पंचतंत्र की कहानी -Panchtantra hindi kahaniya - Panchtantra Stories in hindi | तीन मछलियां

 पंचतंत्र की हिंदी कहानियां तीन मछलियां


  दोस्तों ! आपने बचपन में पंचतंत्र की कहानियाँ- panchtantra ki kahaniya | panchtantra stories in hindi जरुर पढ़ी होगी. मैंने तो बहुत पढ़ी, मैं बचपन में बहुत कहानियाँ पढ़ता था. जो ज्ञान देने के साथ – साथ मेरा मनोरंजन भी करती थी. panchtantra hindi stories. 

संस्कृत नीतिकथाओं में पंचतंत्र-panchtantra  का पहला स्थान माना जाता है। अतः पुस्तक अपने मूल रूप में नहीं रह गयी है, फिर भी उपलब्ध अनुवादों के आधार पर इसकी रचना तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आस- पास निर्धारित की गई है। 

इस ग्रंथ के रचयिता पं. विष्णु शर्मा है। पंचतंत्र को पाँच तंत्रों- भागों में बाँटा गया है। 

मित्रभेद -मित्रों में मनमुटाव एवं अलगाव 

मित्रलाभ या मित्रसंप्राप्ति -मित्र प्राप्ति एवं उसके लाभ 

काकोलुकीयम् -कौवे एवं उल्लुओं की कथा 

लब्धप्रणाश-हाथ लगी चीज (लब्ध) का हाथ से निकल जाना 

अपरीक्षित कारक- जिसको परखा नहीं गया हो उसे करने से पहले सावधान रहें ; हड़बड़ी में कदम न उठायें। 


पंचतंत्र की कई कहानियों panchtantra stories in  hindi- में मनुष्य-पात्रों के अलावा कई बार पशु-पक्षियों को भी कथा का पात्र बनाया गया है तथा उनसे कई क्षाप्रद बातें कहलवाने की कोशिश की गई है।


 तीन मछलियां 


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एक नदी के किनारे उसी नदी से जुड़ा एक बड़ा सा जलाशय था। जलाशय में पानी गहरा होता है इसलिए उसमें काई तथा मछलियों का प्रिय भोजन जलीय सूक्ष्म पौधे होते हैं। ऐसे स्थान मछलियों को बहुत रास आते हैं। उस जलाशय में भी नदी से बहुत सी मछलियां आकर रहती थी। अंडे देने के लिए तो सभी मछलियां उस जलाशय में आती थी। वह जिला से लंबी घास और झाड़ियों द्वारा घिरा होने के कारण आसानी से नजर नहीं आता था। 

 उसी जलाशय में तीन मछलियों का झुंड रहता था। उनके स्वभाव जरा भिन्नता थी। अन्ना मछली संकट आने के लक्षण मिलते ही संकट टालने का उपाय करने में विश्वास रखती थी। दिप मछली कहती थी कि संकट आने पर ही उससे बचने का उपाय याद करो यह दिप का सोचना था।  तीसरी मछली यदि का कहना था की संकट को टालने या उससे बचने की बात बेकार है। करने कराने से कुछ नहीं होता जो किस्मत में लिखा है वह होकर रहेगा। 

एक दिन शाम को मछुआरे नदी में मछलियां पकड़ कर घर जा रहे थे। उस दिन उनके जाल में मछलियां काम फांसी थी। अतः उनके चेहरे उदास थे। तभी उन्हें झाड़ियों के ऊपर मछली और पक्षियों का झुंड जाता हुआ दिखाई दिया। पंछी के चोंच में मछलियां भी थी।  मचवरोनो यह अनुमान लगाया की लगता है झाड़ी के पीछे नदी से जुड़ा कोई जलाशय है। जहां इतनी सारी मछलियां पल रही है। 

मछुआरे की धिरे धिरे झाड़ियों में से होकर चल लालची नजर से मछलियों को देखने लगे। एक मछुआरा बोला हां इस जलाशय में तो मछलियां भरी पड़ी है। आज तक हमें इसका पता ही नहीं लगा। यहां हमें ढेर सारी मछलियां मिलेंगे दूसरा बोला तीसरे ने कहा आज तो शाम गिरने वाली है कल सुबह ही आकर यहां जाल डालेंगे। इस प्रकार मछुआरे दूसरे दिन का कार्यक्रम तय करके वहां से चले गए। 

 तीनों मछलियों ने मछुआरों की बात सुन ली थी। अन्ना मछली ने कहा साथियों तुमने मछुआरे की बात सुन ली अब हमारे यहां रहना खतरे से खाली नहीं है। खतरे की सूचना हमें मिल गई है समय रहते अपनी जान बचाने का उपाय करना चाहिए। मैं तो अभी ही इस जलाशय को छोड़कर नहर के रास्ते नदी में जा रही हूं। 

उसके बाद मछुआरे सुबह आए जाल फेंके मेरी बला से तब तक तो मैं बहुत दूर अंदर  लिया कर रही होंगी। फिर दूसरी मछली दिप मछली बोली तुम्हें जाना है तो जाओ मैं तो नहीं आ रही। अभी खतरा आया कहां है? जो इतना घबराने की जरूरत है। हो सकता है संकट आए ही ना और मछुआरों का यहां आने का कार्यक्रम रद्द हो सकता है, हो सकता है रात को उनके जाल चूहे कुतर जाये और हो सकता की बस्ती में आग लग जाए। उजाला कर उनके गांव को नष्ट कर सकता है या रात को मूसलाधार वर्षा और बाढ़ में उनका गांव बह सकता है।  इसलिए उनका आना निश्चित नहीं है। जब आएंगे तब सोचेंगे हो सकता है यह सकता है इसलिए उनका निश्चित नहीं है। जब आएंगे तब सोचेंगे तब की तब सोचेंगे। 

तभी यदि ने कहा अपनी भाग्यवादी बाद से ही भाग में से कुछ नहीं होने का मछुआरों को आना है तो वह आएंगे हमें जाल में फ़साना है तो हम फसेगी किस्मत में मरना ही लिखा है तो क्या किया जा सकता है?

 इस प्रकार अन्ना तो उसी समय वहां से चली गई और दिप और यदि जलाशय में ही रहे। 

दूसरे दिन सुबह होते ही तो मछुआरे अपने जाल को लेकर आए और लगे जलाशय में जाल फेंकने लगे। और मछलियां पकड़ने संकट को आए देखा तो दिप अपनी जान बचाने के उपाय सोचने लगी उसका दिमाग तेजी से काम करने लगा। आसपास छुपाने के  लिए कोई एक ही जगह भी नहीं थी। तभी उसे याद आया यू जलाशय में काफी इन दिनों से मरे हुए गेंडे की लाश  सड़ रही थी। वह उसके बचाव के काम आ सकती है जल्दी ही उसे बस मिल गई लाश की तलाश करने लगी।  और जैसे ही उसे लाश मिली वह लाश के पेट में घुस गई। और सड़ी लाश की सड़ांध अपने ऊपर लपेट कर बाहर निकली। 

 कुछ ही देर में मछुआरे की जाल में फंस गई मछुआरे ने अपना जाल खींचा और मछलियों को किनारे पर जाल से उलट दिया बाकी मछलियां तो तड़पने लगी परंतु दिप मरी हुई मछली की तरह बनी रही। मछुआरे को सड़न की बदबू का पता लगा तो मछलियों को देखने लगा उसने निश्चल पड़ी दिप मछली को उठाया और सुंघा और जोर से बोलै अरे यह तो कई दिनों से मरी हुई मछलियां आ चुकी है।  

मछुवारे  ने दिप मछली को उठाया और सुंघा और बड़बड़ा कर बुरा सा मुंह बनाकर उस मछुआरे ने दिप मछली को  जलाशय में वापस फेंक दिया। अपनी बुद्धि का प्रयोग करके संकट से बच निकलने में सफल हो गई थी। 

पानी में गिरते ही उसे गोता लगाया और गहराई में पहुंचकर जानकी खैर मनाई। 

 यदि भी दूसरे मछुआरे के जाल में फंस गई थी। और एक टोकरी में डाल दी गई थी। भाग्य के भरोसे बैठी रहने वाली यदि ने उसी टोकरी में अन्य मछलियों की तरह तड़प तड़प कर प्राण त्याग दिए। 




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पंचतंत्र की कहानी 

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