तेनाली रमन हिंदी कहानिया | Tenali Raman story hindi | tenali raman hindi stories | रिवाज

 

 Tenali Raman story hindi or tenaliraman hindi stories- तेनाली रमन हिंदी कहानिया हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। Tenali raman story- तेनाली रमन को तेनाली रामा के नाम से भी जाना जाता है। तेनाली रमन अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे।Tenali raman - तेनाली रमन हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार हिंदी कहानिया। यह कहानी को भी पढ़े  रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर  


रिवाज

Tenalirama-stories-in-hindi
tenalirama-hindi-stories


 एक बार तेनालीराम और महाराज राजा कृष्णदेवराय  मैं बहस छिड़ गई कि लोग  किसी की भी बात पर जल्दी विश्वास कर लेते हैं या नहीं? तेनालीराम का कहना था कि लोगों को आसानी से बेवकूफ बनाकर अपने बात मनवाई जा सकती है। राजा कृष्णदेव राय महाराज का कहना था कि यह गलत है लोग इतने मूर्ख नहीं  होते । की किसी भी बात पर आंख मूंदकर विश्वास कर ले राजा कृष्णदेव राय ने कहा तुम किसी से भी जो चाहे नहीं करवा सकते तेनालीराम । तेनालीराम ने कहा क्षमा करें महाराज लेकिन मैं अपने अनुभव से ही कह रहा हूं । यदि आप में योग्यता है तो आप सामने वाले को मूर्ख बना सकते हैं । और सामने वाले से असंभव से असंभव कार्य भी करवा सकते हैं बल्कि मैं तो यहां तक कहूंगा कि यदि मै चाहु तो किसी से भी आप पर जूता फेंक कर दिखा सकता हूं। 

राजा कृष्णदेव राय ने बहुत गुस्से में आकर कहा क्या कहा तुमने तेनालीराम हम तुम्हें चुनौती देते हैं कि तुम जैसा करके दिखाओ। तेनालीराम ने कहा मुझे  आपकी चुनौती स्वीकार है महाराज । किंतु इसके लिए मुझे कुछ समय चाहिए । कृष्ण देव राय ने कहा तेनालीराम तुम जितना चाहे समय ले सकते हो से महाराज ने कहा ।

 कुछ दिन बाद आई गई हो गई पूर्णब्रह्म तेनालीराम और महाराज दोनों ही अपने अपने कार्य में व्यस्त हो गए। 2 माह बाद राजा कृष्णदेव राय ने दूर के प्रदेश के  सरदार के बेटी से अपना विवाह तय कर दिया । पहाड़ी इलाके के सरदार को महाराज के रीति-रिवाजों का कोई पता नहीं था ।

 पहाड़ी इलाके के सरदार ने जब राजा कृष्णदेव राय के सामने अपने  परेशानी रखी तो वह बोले इस विषय में तुम्हें कोई भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है हमें तो केवल आपकी पुत्री चाहिए। परंतु सरदार फिर भी ना माना वह आपने एकलौती बेटी के विवाह में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रखना चाहता था। 

अतः उसने तेनालीराम से संपर्क किया तेनालीराम ने उसकी समस्या जानकर दिलासा दे दिया कि आप चिंता  ना करें मैं किसी भी समस्या और सारी रस्मों के वक्त वहां पर उपस्थित रहूंगा सरदार को बहुत प्रसन्नता हुई । मगर तेनालीराम ने उसे समझा दिया इस बार एक खुफिया बात का जिक्र किसी से भी ना करें हमने उसे कहा महाराज  कृष्णदेव राय के  वंश  मैं एक रिवाज  यह भी है कि विवाह के सारी रस्में पूरी हो जाने के बाद दुल्हन अपने पांव से मलमल के जूते उतारकर और दूल्हे पर फेंक  कर मारती है । मैं चाहता हूं कि लगे हाथों यह रस्म भी पूरी हो जाए इसलिए मैं गोवा के पुर्तगालियों से एक जोड़ा जूतों का भी लेकर आया हूं । पुर्तगालियों ने मुझे यह भी कहा है कि ऐसा रिवाज यूरोप में भी है। लेकिन वह चमड़े के जूते फेंके जाते हैं । हमारे यहां चमड़े के जूते की तो बात भी  सोची नहीं जा सकती । हां मखमल के जूते की बात तो कुछ और ही है ।

 तेनालीराम की सारी बातें सुनकर पहाड़ी के सरदार ने कहा एक बार और सोच लीजिए तेनालीराम जूती तो जूती ही होती है फिर चाहे वह मखमल की हो या फिर चमड़े की । द्वारा पति को देखकर मारना उचित होगा? और यह बोलकर सरदार  शंका के साथ तेनालीराम की ओर देखने लगा हम तो बेटी वाले हैं कहीं ऐसा ना हो जाए कि लेने के देने पड़ जाए । देखिए साहब विजयनगर के राजघराने में यह रस्म तो होती ही आई है । तो आप ही से करना  चाहे तो करिए और ना करना चाहे तो कोई बात नहीं है ।

 पहाड़ी वाले सरदार ने कहा नहीं नहीं तेनालीराम जी कोई भी रस्म अधूरी नहीं रहनी चाहिए यदि ऐसा होगा तो ससुराल में बेटी को अपमानित होना पड़ेगा । लाइए जूती मुझे दे दीजिए मैं अपनी बेटी को विवाह में यह पहना दूंगा और उसे रस्मा समझा दूंगा ।

विवाह के दिन विवाह की सारी रस्में पूरी हो चुकी थी । महाराज कृष्ण देव राय को डोली के विदाई का इंतजार था। दुल्हन को बाहर लाकर दहेज के सामान के साथ ही बिठाया गया था । अचानक दुल्हन ने आप नेपाल से मखमल के जूते उतारे और मुस्कुराते हुए महाराज पर फेंक मारी  । हादसे के बाद महाराज आग बबूला हो गए । वह तिलमिला उठे और वह क्रोध और अपमान से आग बबूला हो गए। 

तेनालीराम पास ही बैठे थे उन्होंने राजा कृष्णदेव राय का हाथ दबाया और जल्दी से उनके कान के पास मुह ले जाकर कहा महाराज विरोध ना करें उन्हें क्षमा कर दें यह सब मेरा ही किया धरा था। महाराज ने तुरंत उस समय के बाद याद करके तुरंत मुस्कुरा दिया  और रानी के पास आकर  उनकी जूती उठाकर उनके करीब आए और जूती वापस दे दी ।।   रानी ने लज्जित स्वर में कहा क्षमा कर दीजिए महाराज लेकिन आपके वंश  की रसम अदा कर रही थी मैं । इसीलिए मैंने जूती फेक मारी क्षमा कर दीजिए। राजा कृष्णदेव राय ने कहा कोई बात नहीं प्रिय ने हमें सब कुछ बता दिया है तुम्हें डरने की कोई आवश्यकता नहीं है ।  

जब राजा कृष्णदेव राय विजय नगर पहुंचे तो अगले दिन राज दरबार में महाराज ने कहा तुम सच कहते थे तेनालीराम लोग किसी भी बात पर विश्वास कर लेते हैं ।


हिंदी कहानिया पढनेकेलिए यहाँ Click करे 
अकबर बीरबल हिंदी कहानिया- akbar birbal story in hindi

  1. ५ बेहतरीन अकबर बीरबल हिंदी कहानिया। - akbar birbal story in hindi
  2. पति को सबक | तानसेन की शर्त - akbar birbal story in hindi
  3.  अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां | बीरबल को दंड | नन्हा साक्षीदार akbar birbal story in hindi
  4. अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां | अकबर बादशाह की बीमारी | एक दांत का सपना akbar birbal story in hindi
  5. अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां | छड़ी लगे छम छम | काझी की हुई फजीती akbar birbal story in hindi
  6. अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां | हसन न्हाई akbar birbal story in hindi
  7. अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां | एक शेर मांस akbar birbal story in hindi

तेनाली रमन की चतुराई 

  1. रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर tenali-raman-hindi-stories
  2. तेनाली रमन और दो चोर | अतुलनीय चतुराईtenali-raman-hindi-stories
  3. तेनाली रमन और उसका बिघडेल घोडा  | तेनाली रमन और बादशाह बाबर की कहानी 
  4. तेनाली रमन की कला बुद्धि | दूध से डरने वाली बिल्ली | अनमोल अंगूठी -tenali-raman-hindi-stories
  5. Tenali Raman story hindi | हाथियों का उपहार | तेनालीराम की घोषणा
  6. tenali raman hindi stories | असली अपराधी | तेनालीराम की कला बुद्धि 
  7. तेनालीराम का घोड़ा | तेनालीराम और लाल मोर - Tenaliram aur lal mor hindi kahani
  8. Tenali raman hindi stories | बाबापुर की रामलीला  | बिल्ली के लिए गाय
  9. Tenali raman hindi stories -रंग बिरंगी मिठाइयां | रंग-बिरंगे नाखून  
  10. Tenali Raman story hindi -  जाड़े की मिठाई | जनता की अदालत
  11.  Tenali raman hindi stories |  मूर्खों का साथ हमेशा दुखदाई होता है | मटके में मुंह
  12. Tenali Raman story hindi | tenali raman hindi stories | तेनाली एक योद्धा

No comments:

Powered by Blogger.