पंचतंत्र की कहानी -Panchtantra hindi kahaniya - Panchtantra Stories in hindi | पक्षी का न्याय

 दोस्तों ! आपने बचपन में पंचतंत्र की कहानियाँ- panchtantra ki kahaniya | panchtantra stories in hindi जरुर पढ़ी होगी. मैंने तो बहुत पढ़ी, मैं बचपन में बहुत कहानियाँ पढ़ता था. जो ज्ञान देने के साथ – साथ मेरा मनोरंजन भी करती थी. panchtantra hindi stories. 

संस्कृत नीतिकथाओं में पंचतंत्र-panchtantra  का पहला स्थान माना जाता है। अतः पुस्तक अपने मूल रूप में नहीं रह गयी है, फिर भी उपलब्ध अनुवादों के आधार पर इसकी रचना तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आस- पास निर्धारित की गई है। 

इस ग्रंथ के रचयिता पं. विष्णु शर्मा है। पंचतंत्र को पाँच तंत्रों- भागों में बाँटा गया है। 

मित्रभेद -मित्रों में मनमुटाव एवं अलगाव 

मित्रलाभ या मित्रसंप्राप्ति -मित्र प्राप्ति एवं उसके लाभ 

काकोलुकीयम् -कौवे एवं उल्लुओं की कथा 

लब्धप्रणाश-हाथ लगी चीज (लब्ध) का हाथ से निकल जाना 

अपरीक्षित कारक- जिसको परखा नहीं गया हो उसे करने से पहले सावधान रहें ; हड़बड़ी में कदम न उठायें। 


पंचतंत्र की कई कहानियों panchtantra stories in  hindi- में मनुष्य-पात्रों के अलावा कई बार पशु-पक्षियों को भी कथा का पात्र बनाया गया है तथा उनसे कई क्षाप्रद बातें कहलवाने की कोशिश की गई है।


 पक्षी का न्याय



 एक थी रानी राजा की प्यारी थी। रानी भी बहुत सुंदर थी। मगर गुस्सैल थी। 

एक दिन रानी और दसिया राज महल की छत पर बैठे बाल सुखा रही थी। और सोने की शीशी में चंदन का तेल और चांदी की कंगी लिए दासिया खड़ी थी। इतने में पक्षियों का एक झुंड राज महल के ऊपर से उड़ता हुआ निकला अचानक किसी पक्षी की विष्टा रानी के सुनहरे बालों पर गिर गई थी। रानी के तेवर बदल गए भाई कौन था वह पक्षी और सोचने लगी पक्षियों ने मेरा अपमान किया है। इनकी यह मजाल कि मुझ पर विष्टा के उड़ जाए, वह भी इस राज्य की रानी पर... रानी आगबबूला होकर को भवन में चली गई। 

दसियों ने उसके सिर से विष्टा साफ करनी चाही परंतु रानी ने कहा जब तक राजा पक्षियों को दंडित नहीं करते यह विष्टा बालों में ऐसे ही रहेगी और उसने बाल बिखेर लिए अन्न जल त्याग दिया। 

राजा को पता चला तो रेशमी रुमाल लिए कोप भवन में गए।  जिस पक्षी ने अनजाने में यह कर दिया है उसे क्या पता था तुम नीचे बैठी हो? आओ मैं साफ कर दूं।  इस पर रानी ने इनकार करते हुए कहा आखिर पक्षी भी हमारी प्रजा है। आप उन के राजा हैं। मैं उनकी रानी। पक्षियों की यह मेरे सिर पर विष्टा कर दे ऐसी बेइज्जती से तो मरना ही अच्छा है।

राजा के समजाने पर भी रानी नहीं मानी और मुंह फेर कर बैठ गई। रानी के सामने राजा हार गए। उन्होंने जंगल में ऐलान कर दिया कल सारे पक्षी राज महल के सामने वाले मैदान में इकट्ठे हूँ। 

ऐलान सुनकर पक्षियों में खलबली मच गई सुबह होते ही पक्षियों के झुंड के झुंड राज महल के सामने आने लगे।  राजा ने पक्षियों से पूछा क्या सब पक्षी आ गए हैं? कोई बाकी तो नहीं बचा? हुजूर सब आ गए केवल हमारी रानी कोयल नहीं आई। उसे कोई जरूरी काम आ गया था। और ने उत्तर दिया। 

राजा ने कहा क्या मेरी आज्ञा से भी जरूरी काम था? उसे राजा ने पूछा हुजूर वह कहीं फैसला करने गई है। बाकि पक्षियोने कहा और में नम्रता पूर्वक हमारा क्या अपराध है महाराज? कड़क की आवाज में राजा ने कहा रानी के बालों पर विष्टा किसने की है? उसे मौत की सजा मिलेगी सारे पक्षी चुप रहे। 

राजा बहोत ग़ुस्सा हो गया वह बोलै यदि तुम में से कोई अपना अपराध स्वीकार नहीं करेगा तो मैं सब को मौत के घाट उतार दूंगा। तब एक कबूतर आ गया या गुटर गू ते हुए बोला मालिक हमारी मुखिया कोयल है अब दंड देने से पहले उनसे पूछ ले। 

राजा ने फिर कोयल को लाने के लिए दूत भेजा इस बार कोयल कू कू करती आ गई वह पक्षियों के बीचो बीच आकर बैठ गई तेज आवाज में राजा बोला क्यों रे कोयल के बच्चे क्या जरूरी काम था तुझे? हुजूर सात समुद्र पार मुझे न्याय करने बुलाया गया था। कोई आदर से बुलाए तो जाना पड़ता है देरी के लिए क्षमा चाहती हूं कोयल बोली अच्छा तू भी न्याय करने लगी जरा मैं भी तो सुनूं क्या न्याय करने गई थी?

 मालिक सात समुद्र पार एक बड़ी सभा जुड़ी थी। समस्या थी कि इस दुनिया में पुरुष अधिक है या महिलाएं? कोयल ने कहा।  फिर तूने क्या किया तू छोटी सी है राजा ने कहा । छोटी शरीर से कोई संबंध नहीं है। मैंने न्याय किया की दुनिया में स्त्री पुरुषोंसे अधिक है। 

राजा सोच में पड़ गया।  राजा ने पूछा तूने सारे श्री पुरुषों की गिनती कर ली है ? राजा ने आश्चर्य होकर पूछा। कोयल ने कहा मैंने गिनती तो नहीं परंतु में सोच सकती हूं और मेरी राय में जो पुरुष अपनी बुद्धि से कामना लेकर स्त्री की मूर्खतापूर्ण बातें मान लेता है उसे भी मै स्त्री की श्रेणी में ही गिनती हूँ। 

यह सुनते ही राजा का दिमाग चकरा गया तो तू मुझे भी स्त्री समझती है राजा ने पूछा? वह तो आप जाने महाराज कोयल बोली। 

 कोयल की बात राजा के दिल को छू गई बोला तू ठीक कहती है। मैं बेकार रानी के कहने में आ गया।  तुम सभी जा सकते हो।राजा का इतना कहना था कि सब पक्षी चह चहाते हुए उड़ गए। 

उधर पक्षी उड़ाने बाद रानी फिर कोप भवन में जाकर बैठ गए। राजा ने पूछा तोह रानी बोली मैं रानी बेकार ही बनी हूँ। में तो पक्षियों से भी हार गई।  मेरा कुछ मान होता तो आप पक्षियों के कहने में आकर अपनी आज्ञा वापस ना लेते।  

 एक बार फिर राजा रानी के बातो मई आ गया उन्होंने दूसरे दिन पक्षियों को फिर इकट्ठा होने का आदेश दिया।  सारे पक्षी कट्ठे हो गए परंतु कोयल आज भी नहीं आई। तो पक्षियों से पूछा आज क्यों नहीं आई? तुम्हारी मुखिया वह आज भी सात समुद्र पार न्याय करने गई है? राजा ने पूछा आती ही होगी महाराज तोते ने कहा।  

कुछ देर बाद कोयल आ गई। हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए बोली क्षमा चाहती हूं महाराज मुझे आज फिर न्याय करने जाना पड़ा था। आज क्या समस्या थी? उत्सुकता वश राजा ने पूछा। बड़ी गंभीर समस्या थी इस दुनिया में लोग अधिक जन्म लेते हैं या मरते अधिक है? इसी बात पर हफ्तों से बहस छिड़ी हुई थी कोयल बोली इस दुनिया में जन्म ही अधिक लेते हैं यदि मरते अधिक तो दुनिया में लोग कभी के समाप्त हो जाते। रानी जी मैंने न्याय किया है कि लोग मरते आधी है।  कोयल बोली रानी जी मैंने असल में जो वचन देकर अपनी बात ना रख सके बिना वजह अपना निर्णय बदल दे ऐसे प्राणी मारे के समान ही है।  

राजा ने सुना तो सोच में पड़ गया उसे लगा कि ठीक कहती है मैं राजा हूं। मुझे सोच समझ कर फैसला करना चाहिए बार-बार फैसला बदलना ठीक नहीं उसने रानी से कहा तुम जो चाहो करो मैं इन्हें दंड नहीं दूंगा।  

रानी का चेहरा लटक गया राजा ने पक्षियों से कहा मैंने नाहक निर्दोष प्राणियों को दंड देना चाहा अब मेरी आंखे खुल गई है। जाओ उड़ जाओ सब पक्षी फिर पंख फड़फड़ा कर चले गए। 

इधर-उधर रानी फिर को भवन में चली गई इस बार रानी की स्नेह लेगी दास जी ने एक योजना बनाई। योजना अनुसार दासी  राजा के पास चली गयी। 

दासी राजा से बोली महाराज छोटी रानी गर्भवती है। अब तक आपको कोई बच्चा नहीं था। रानी ने क्रोध में खाना छोड़ दिया है। ऐसा करना बच्चे के लिए घातक होगा।  रानी और बच्चे की प्राण रक्षा कीजिए। 

राजा डर गया।  कोप  भवन में गया और रानी से कहा तुम चलकर महल में आराम करो राजा बोला मैं कल ही सारे पक्षियों को मौत के घाट उतार दूंगा। 

अगले दिन फिर राजा ने पंछी को बुलाने के लिए ऐलान करा दिया। पक्षी बहुत डर गए कोयल बोली डरो नहीं तुम चलो मैं पीछे से आती हूं सब ठीक हो जाएगा। पक्षी इकट्ठे हो गए। इस बार कोयल फिर नहीं दिखाई दी। 

 कुछ देर बाद जब वो आई तो राजा ने पूछा आज भी फैसला देने गई थी क्या? क्या करूं मुझे कोई बुलाए तो जाना ही पड़ता है।  गोयल ने भोलेपन से कहा। राजा ने पूछा आज क्या उलझन थी? बड़ी गंभीर जरा हम भी तो सुने जी महाराज दुनिया में मूर्ख अधिक हैं या बुद्धिमान? इसी को लेकर बहस छिड़ी हुई थी। तो तू ने क्या फैसला किया? राजा ने पूछा बड़ी। आसान बात है दुनिया मूर्खों से भरी पड़ी है। बुद्धिमान ओं की संख्या ज्यादा कैसे होगी? कोयल बोली तू गलत कहती है मेरे दरबार में इतने लोग हैं सभी एक से बढ़कर एक बुद्धिमान है मूर्ख एक भी नहीं है। 

यही हालत दुनिया में है सो में भी एक-दो मूर्ख होते हैं राजा ने बतलाया।  कोयल बोली गलती क्षमा हो आपकी बात से मैं सहमत नहीं हूं। जो मनुष्य अपने सद्बुद्धि से काम ना लेकर दूसरों की बुद्धि से काम ले वह मुर्ख नहीं तो और क्या है ?  एक रानी और बेटे के लिए इतनी पक्षियों को प्राण दंड दे रहे हैं और यह दरबारी आप की हां में हां मिला रहे हैं। इस पर भी दासी जी ने झूठ बोला है।  रानी गर्भवती नहीं फिर भी आप बात मान गए। आप ही बताएं क्या यह बुद्धिवानो का  का काम है

 राजा चुप उसने पूछा तुम कैसे कह सकती हो कि दासी ने झूठ बोला है? राजा ने खोज कर आई तो झूठ का भंडा फूट गया। राजा की गर्दन शर्म से झुक गई। अब राजा गंभीर होकर बोला कोयल तुमने मेरी आंखें खोल दी आज से तुम आजाद हो। अब कोई पक्षी कभी किसी राजा के अधीन नहीं रहेगा।  तुम आजाद हो जहां चाहो रहो जहां चाहे जाओ सारे पक्षी राजा की जय जयकार करते हुए उड़ गए। 


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पंचतंत्र की कहानी 

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