तेनाली रमन हिंदी कहानिया | Tenali Raman story hindi | tenali raman hindi stories | संतुष्ट व्यक्ति के लिए उपहार |सीमा की चौकसी

 Tenali Raman story hindi or tenaliraman hindi stories - तेनाली रमन हिंदी कहानिया हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। Tenali raman story - तेनाली रमन को तेनाली रामा के नाम से भी जाना जाता है। तेनाली रमन अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे।Tenali raman - तेनाली रमन हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार हिंदी कहानिया। यह कहानी को भी पढ़े  रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर 


१.  संतुष्ट व्यक्ति के लिए उपहार

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तेनालीराम बड़ी प्रसन्न मुद्रा में दरबार में आया। उसने बहुत अच्छे कपड़े और गहने पहन रखे थे । उसे देखकर राजा कृष्णदेव राय बोले तेनालीराम आज तुम बहुत प्रसन्न न दिखाई दे रहे हो!  क्या बात है? महाराज कोई खास बात नहीं है तेनालीराम ने बहुत प्यार से बोला । 

राजा कृष्णदेव राय बोले नहीं आज मुझे तुम बहुत ही खुश दिखाई दे रहे हो। वैसे एक बात है जब तुम मुझे पहली बार मिले थे तब तुम्हारा व्यक्तित्व बहुत ही साधारण था। उस पर तेनालीराम बोला महाराज प्रत्येक व्यक्ति समय के साथ बदलता है। विशेषता जब उसके पास थोड़ा बहुत ध्यान होता है। मैंने आपके द्वारा दिए गए उपहारों से काफी बचत कर लिए हैं। राजा कृष्णदेव राय बोले तब तो तुम्हें अपने बचत का कुछ भाग दूसरों में भी बांटना चाहिए। तेनालीराम ने कहा महाराज अभी मैंने दूसरों को देने लायक पर्याप्त बचत नहीं की है । यह सुनकर राजा ने तेनालीराम की दान करने की प्रवृत्ति के लिए उसे बहुत लताड़ा और बहुत सुनाई। 

तेनालीराम ने जब देखा कि उसके बाद का राजा बुरा मान गए हैं तो उसने अपनी गलती स्वीकारते हुए राजा से पूछा कि उसे क्या दान करना चाहिए? राजा कृष्णदेव राय ने कहा तेनाली तुम एक घर बनाओ और उससे दान में दो उसे तुम्हें प्रसन्नता होगी  । तेनालीराम  ने राजा की बात मानी । 

अगले कुछ माह तक वह एक भव्य मकान बनाने में व्यस्त हो गया। कुछ माह बाद जब मकान बनकर तैयार हो गया तब तेनालीराम ने मकान के ऊपर एक दर्द भी टांग दी । जिस पर लिखा था यह घर उस व्यक्ति को दिया जाएगा जिसने अपने जीवन में मात्रा उतनी ही प्रसन्नता व्यक्त करता है जितना उसके पास है । कई लोगों ने उस   फलक को पढ़ा को पढ़ा लेकिन कोई भी तेनालीराम के पास नहीं आया। 

एक बार एक निर्धन व्यक्ति को उस घर के बारे में पता चला उसने सोचा कि क्यों ना वह उस मकान को प्राप्त करने की कोशिश करें यह सोचकर वह तेनाली के घर पहुंचा। उसने बाहर लगी है फलों को बार-बार  पढ़ा  । उसने सोचा किस लोग कितने मूर्ख है जो इस मकान को लेने नहीं आ रहे हैं? उसने सोचा और बोला श्रीमान मैंने घर के बाहर  दंगे हुए फलक को को  पड़ा है । मैं दावा करता हूं कि मैं सबसे प्रसन्न और संतुष्ट व्यक्ति हूं अता में एक मकान का अधिकारी हूं । उस पर तेनालीराम ने कहा और हंसते हुए बोला यदि के घर के बिना तुम प्रसन्न और संतुष्ट हो तो फिर तुम्हें इस घर की आवश्यकता क्या है? और यदि तुम्हें आवश्यकता है तो तो फिर तुम्हारा दावा गलत है क्योंकि जो कुछ तुम्हारे पास है तुम उसे संतुष्ट हो तो तुम उसे क्यों मांगोगे निर्धन व्यक्ति का अपने भूल का आभास हुआ । 

उसके बाद उस मकान को मांगने के लिए कोई भी नहीं आया। अंत में तेनालीराम ने सारी कथा राजा को सुनाई। तुमने एक बार फिर अपनी बुद्धिमानी का परिचय दे दिया है लेकिन तुम उस मकान का क्या करोगे। कोई शुभ दिन है देख कर उस में प्रवेश करूंगा ।और इस तरह से फिर एक बार तेनालीराम ने राजा कृष्णदेव राय को अपनी बुद्धि का परिचय देते हुए बोलती बंद कर दी।

२. सीमा की चौकसी

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विजय नगर में पिछले कई दिनों से तोड़फोड़ की घटना बड़ी जा रही थी। राजा कृष्णदेव राय इन घटनाओं सेकाफी चिंतित हो उठे। उन्होंने मंत्री परिषद की बैठक बुला ली। और इन घटनाओं को रोकने के लिएक्या उपाय कर सकते हैं यह सारे मंत्रियों से पूछा।पड़ोसी दुश्मन देश के एक गुप्तचर यह काम कर रहे हैं हमें उन्हें नरमी से नहीं सकती से निपटना चाहिए सेनापति का सुझाव था।

सीमा पर सैनिक बढ़ाए जाने चाहिए ताकि सीमा की सुरक्षाठीक प्रकार से हो सकेमंत्री जी ने सुझाया। राजा कृष्णदेवराय तेनालीराम की ओर देखा। तेनालीराम ने कहा मेरे विचार से तो सबसे अच्छा ही होगासीमा पर एक मजबूत दीवार बना दी जाएऔर वह हर समय सेना के सिपाही गस्त  करें । 

मंत्री जी के विरोध के बावजूद राजा कृष्णदेव राय ने तेनाली का यह सुझाव सहरसा मान लिया। सीमा पर दीवार बनवाने का काम भी उन्होंने तेनालीराम को ही सौंप दिया। और कहा कुछ महीने के अंदर पूरी दीवार बन जानी चाहिए । 

इसी तरह 2 महीने बीत गए लेकिन दीवार का काम कुछ आगे ही नहीं बढ़ सका । राजा कृष्णदेव राय के पास भी यह खबर पहुंची। उन्होंने तेनालीराम को बुलाया और पूछा और पूछताछ की मंत्री भी वहां उपस्थित थे । राजा कृष्णदेव राय ने पूछा तेनालीराम दीवार का काम आगे क्यों नहीं बढ़ा है । तेनालीराम ने कहा क्षमा करें महाराज बीच में एक पहाड़ आ गया है। पहले उसे हटवा रहा हूं । राजा कृष्णदेव राय ने बड़ा आश्चर्य से  ऊंचा पहाड़ कैसा पहाड़ पहाड़ तो हमारी सीमा पर नहीं है । बीच में मंत्री जी बोले  महाराज के नाले राम पगला गया है । 

तेनालीराम ने सारी बात सुनकर भी चुप ही रहे । उन्होंने मुस्कुराकर ताली  बजाई । जैसे तेनालीराम ने ताली बजाई  वैसे ही सैनिकों से 20 व्यक्ति राज दरबार में आ गए । राजा कृष्णदेवराय तेनालीराम से पूछा इतने सारे लोग कौन है? तेनालीराम ने कहा पहाड़ । यह दुश्मन देश के घुसपैठिए है । 

महाराज दिन में जितनी दीवार बनती थी रात में लोग उसे तोड़ते थे । बड़ी मुश्किल से यह लोग पकड़ में आ गए हैं । काफी तादाद में इनसे हथियार भी मिले । पिछले 1 महीने में इनमें से आधे 5 -5 बार पकड़े गए । मगर......  राजा कृष्णदेव राय ने कहा इसका कारण मंत्री जी बताएंगे कि ने दंड क्यों नहीं दिया गया है?  तेनालीराम ने कहा इन की सिफारिश पर इन लोगों को हर बार छोड़ा गया था। यह सुनकर मंत्री जी के चेहरे पर से हवाइयां उड़ने लगी। 

राजा कृष्णदेव राय सारी बात समझ गए। उन्होंने सीमा की सुरक्षा का सारा काम  मंत्री से लेकर तेनालीराम को दे दिया था ।  इस तरह एक बार फिर तेनालीराम ने राजा कृष्णदेव राय महाराज और प्रजा को बचा लिया ।

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