तेनाली रमन हिंदी कहानिया | Tenali Raman story hindi | tenali raman hindi stories | मूर्खों का साथ हमेशा दुखदाई होता है | मटके में मुंह

 Tenali Raman story hindi or tenaliraman hindi stories- तेनाली रमन हिंदी कहानिया हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। Tenali raman story- तेनाली रमन को तेनाली रामा के नाम से भी जाना जाता है। तेनाली रमन अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे।Tenali raman - तेनाली रमन हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार हिंदी कहानिया। यह कहानी को भी पढ़े  रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर  


१. मूर्खों का साथ हमेशा दुखदाई होता है

Tenali_raman_hindi_stories
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विजय नगर के राजा राजा कृष्णदेव राय जहां कहीं भी जाते जब भी जाते अपने साथ हमेशा तेनालीराम को जरूर ले जाते इस बात से अन्य दरबारियों को बहुत चिढ़ होती । एक दिन तीन-चार दरबारियों ने मिलकर राजा कृष्णदेव राय से प्रार्थना की महाराज किसी अन्य व्यक्ति को भी बाहर ले जाने का उसे अवसर दीजिए । 
राजा को यह बात उचित लगी उन्होंने उन दरबारियों को विश्वास दिलाया की भविष्य में अन्य दरबारियों को भी अपने साथ घूमने फिरने का अवसर देंगे। 
एक बार जब राजा कृष्णदेव राय वेश बदलकर कुछ गांव में भ्रमण करने के लिए को घूम रहे थे तो आपने साथ उन्होंने इस बार तेनालीराम के अलावा  दूसरे राज दरबारियों को साथ ले लिया । राजा कृष्णदेव राय ने दो अन्य दरबारियों को अपने साथ ले लिया। 
वह घूमते घूमते एक गांव में पहुंचे। वहां पर उन्होंने खेतों में देखा कि वहां पर एक झोपड़ी थी। और कुछ किसान आपस में कुछ गपशप कर रहे थे । राजा और अन्य लोग उन किसानों के पास पहुंचे। और उनसे पानी मांग कर दिया । राजा ने किसानों से पूछा कहो भाई लोग तुम्हारे गांव में कोई भी व्यक्ति किसी कष्ट में तो नहीं है। अपने राजा से कोई और संतुष्ट नहीं है? इन प्रश्नों को सुनते ही गांव वालों को लगा कि वह लोग अवश्य ही राज्य के अधिकारी है । 
वह बोले महाशय हमारे गांव में खूब शांति है चैन है सुख है। सब लोग सुखी है। दिन भर कड़ी मेहनत करते हैं।  अपना कामकाज करते हैं और रात को सुख से नींद लेते हैं। किसी को कोई दुख नहीं है। राजा कृष्णदेव राय अपनी प्रजा को अपनी संतान की तरह प्यार करते हैं इसलिए राजा से असंतुष्ट होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। ऐसा उन लोगों ने कहा। 
इस गांव के लोग राजा को कैसा समझते हैं? राजा कृष्णदेव राय ने एक और प्रश्न किया। राजा कृष्णदेव राय को इस सवाल पर एक बूढ़े किसान ने कहा और खेत में से एक मोटा सा गन्ना तोड़कर उस गन्ने को राजा को दिखाते हुए कहा श्रीमान जी हमारे राजा कृष्णदेव राय बिल्कुल इस गन्ने की तरह है। 
अपनी तुलना एक गन्ने से होते देख राजा कृष्णदेव राय सब पका गए। उनकी समझ में बात बिल्कुल भी नहीं आई । किस बूढ़े की स्थान के बाद का अर्थ क्या था। राजा कृष्णदेव राय के समझ में ना आया किस गांव में रहने वाले अपने राजा को क्या समझते हैं । उनके राज्य के प्रति उनके विचार क्या है।
राजा कृष्णदेव राय के साथ दो अन्य साथी थे। राजा कृष्णदेव राय ने उससे पूछा इस बूढ़े किसान के कहने का क्या अर्थ है? राजदरबारी राजा के साथ थे  वह राजा का यह सवाल सुनकर एक दूसरे के मुंह देखने लगे फिर एक साथ इतनी हिम्मत की और कहा महाराज जी  बूढ़े किसान के कहने का अर्थ है कि हमारे राजा इस मोटे गन्ने की तरह कमजोर है । उसे जब भी कोई चाहे एक झटके में उखाड़ सकता है । 
 जैसे ही मैंने यह होगा ना उखाड़ लिया है। राजा ने अपने साथी के इस बात पर विचार किया राजा कृष्णदेव राय को यह बात सही मालूम हुई। वह गुस्से से भर गए और उस बूढ़े किसान को बोला तुम शायद मुझे नहीं जानते कि मैं कौन हूं । राजा की क्रोध से भरी वाणी सुनकर वह बूढ़ा किसान डर के मारे  थरथर कांपने लगा । झोपड़े में से एक अन्य बूढ़ा उठ खड़ा हुआ। और नम्र स्वर में बोला महाराज हम आपको अच्छी तरह से जान गए हैं। पहचान गए हैं । लेकिन हमें दुख इस बात का है कि आपके साथी ही आप क्या असली रूप को नहीं पहचान गए। मेरे साथी किसान का कहने का मतलब है? 
हमारे महाराज हमने प्रजा के लिए इस गन्ने की तरह कोमल,मीठे और रसीले है । परंतु दोस्तों के लिए और दुश्मनों के लिए महानतम कठोर भी है ।उस बूढ़े किसान नेगन्ने की बात काउपहार करते हुए राजा को समझाया । इतना कहने के साथ ही उस बूढ़े व्यक्ति ने अपना लिबासउताराऔर अपनी नकली दाढ़ी मूछें उतारने लगा उसे देखते ही राजा चौक गए।
राजा कृष्णदेव राय केजो साथी थे उन्होंने कहा तेनालीरामतुमने यह भी मेरा पीछा नहीं छोड़ा?तेनालीराम ने कहा तुम लोगों का पीछा कैसे छोड़ सकता हूंअगर मैं पीछा करतातो तुम इन सरल किसानों कोमौत के घाट उतार देते।और महाराज के मन मेंकिसानों के खिलाफ जहर पैदा करते।
 तुम ठीक कह रहे हो तेनालीराम राजा कृष्णदेव राय ने कहा।मूर्खों का साथ हमेशा दुखदाई होता है।भविष्य में मैं कभी भी तुम्हारे अलावा किसी और के साथ जाऊंगा ही नहीं।
उन सब की आपस की बातचीत सुनकर गांव वालों को पता चल गया कि उनके झोपड़ेमैं स्वयं महाराज राजा कृष्णदेव राय पधारे थे।और भेष बदलकर पहले से ही उनके बीचबैठा हुआ आदमी ही तेनालीराम है।तो गांव वाले उनके स्वागत के लिए दौड़ पड़े पूर्णविराम कोई चारपाई उठा कर लायातो कोई गन्ने का ताजा रस निकालकर ले आया।गांव वालों ने बड़े ही मन से अपने मेहमानों का स्वागत किया।उनकी आवभगत और प्यार की भावना देखकरराजा कृष्णदेव राय 1 ग्राम वासियों का प्यार देखकर आत्म विभोर हो गए।तेनालीराम की चोट से दुखी हुए दरबारी मुंह लटका कर जमीन को  रेतते हुए रह गए । और तेनालीराम मन ही मन मुस्कुरा  रहे थे ।

 २. मटके में मुंह

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एक बार महाराज राजा कृष्णदेव राय किस बात से तेनालीराम पर नाराज हो गए। गुस्से में आकर उन्होंने तेनालीराम से भरी राज्यसभा में कह दिया कल से मुझे दरबार में अपना मुंह नहीं दिखाना । उसी समय तेनालीराम दरबार से चले गए।
 महाराज राज्यसभा की ओर आ रहे थे तभी एक चुगलखोर ने उन्हें यह कहकर भड़का दिया कि तेनालीराम आपके आदेश के खिलाफ दरबार में उपस्थित है। बस यह सुनते ही महाराज आग बबूला हो गए पूर्णब्रह्म चुगलखोर दरबारी आगे बोला । आपने साफ कहा था कि दरबार में आने पर कोड़े पड़ेंगे। 
इसकी भी उसने कोई परवाह नहीं की । अब तो तेनालीराम आपके हुकुम की भी अवहेलना करने में जुटा हुआ है । राजा दरबार में पहुंचे उन्होंने देखा कि सिर पर मिट्टी का एक घड़ा  डालकर तेनालीराम एक विचित्र हरकतें कर रहा है। घड़े पर चारों ओर जानवरों के मुंह बने थे ।
 राजा कृष्णदेव राय ने बहुत गुस्से से पूछा तेनालीराम यह क्या बेवकूफी है? यह क्या बेहूदा हरकतें है? तुमने हमारे आज्ञा का उल्लंघन किया है । राजा कृष्णदेव राय ने कहा अब दंड स्वरूप पकोड़े खाने के लिए भी तैयार हो जाओ। 
तेनालीराम ने कहा मैंने कौन सी आपकी आज्ञा का उल्लंघन किया है महाराज? घड़े में मुंह छुपाए हुए तेनालीराम ने निचले स्वर में कहां पूर्णिमा आपने तो कहा था कि अपना मुंह ना दिखाओ क्या आपको मेरा मुंह दिख रहा है? हे भगवान कहीं कुंभार ने फूटा हुआ घड़ा तो नहीं दे दिया । यह सुनते ही महाराज की हंसी छूट गई । वह बोले तुम जैसे बुद्धिमान और हाजिर जवाबी इंसान से कोई नाराज ही नहीं हो सकता । अब इस घड़े को हटाओ और सीधी तरह से अपना  आसन  ग्रहण करो ।

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