तेनाली रमन हिंदी कहानिया | Tenali Raman story hindi | tenali raman hindi stories | स्वप्न महल | पुरस्कार के अधिकारी

 Tenali Raman story hindi or tenaliraman hindi stories- तेनाली रमन हिंदी कहानिया हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। Tenali raman story- तेनाली रमन को तेनाली रामा के नाम से भी जाना जाता है। तेनाली रमन अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे।Tenali raman - तेनाली रमन हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार हिंदी कहानिया। यह कहानी को भी पढ़े  रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर  



 १. स्वप्न महल

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एक रात राजा कृष्णदेव राय ने सपने में एक बहुत सुंदर महल देखा। जो हवा में लटक रहा था। उसके अंदर के कमरे रंग-बिरंगे पत्थर से बने थे। उसमें रोशनी के लिए दीपक  या  मशाल की भी जरूरत नहीं थी । बस जब मन किया अपने आप प्रकाश हो जाता था। और जब मन चाहे तब अंधेरा। उस माहौल में सुख और ऐश्वर्य के अनोखे सामान भी मौजूद थे। धरती से महल में पहुंचने के लिए बस इच्छा करना कि आवश्यक था। आंखें बंद करो और महल के अंदर।
दूसरे दिन राजा ने अपने राज्य में घोषणा करवा दी। जो भी यह महल बना कर राजा को देगा उसे 100000 स्वर्ण मुद्राओं का पुरस्कार दिया जाएगा। 
सारे राज्य में राजा कृष्णदेव राय के सपने की चर्चा शुरू हो गई । सभी नगर वासी सोचते रह गए पी ए राजा कृष्णदेव राय को न जाने क्या हो गया है। कभी सपने भी सच होते हैं? पर राजा से यह बात कहेगा कौन?
राजा कृष्णदेव राय ने अपने राज्य के सभी कारीगरों को बुलवाया। और सभी कारीगरों को अपना सपना के सुनाया।
 वह अनुभवी कारीगरों ने राजा कृष्णदेवराय को बहुत समझाया कि महाराज यह तो कल्पना की बातें हैं। इस तरह का महल नहीं बनाया जा सकता।  लेकिन राजा कृष्णदेवराय के सिर पर तो वह सपना भूत की तरह सवार हो गया था। 
कुछ धूर्त लोगों ने तो इस बात का लाभ उठाया । उन्होंने राजा कृष्णदेव राय को सपनों का महल बना देने का वादा किया । ताकि वह उनसे धन लूट सके। 
इधर मंत्री बहुत परेशान  थे। राजा कृष्णदेव राय को समझाना कोई आसान काम नहीं था। अगर उनके मुंह पर सीधे-सीधे कह दो कि वे बेकार के सपने में ना उलझते रहे।  तो महाराज के क्रोधित हो जाने का संभव था।  
मंत्रियों ने आपस में सलाह की अंत में फैसला किया गया कि समस्या को तेनालीराम के सिवा और कोई नहीं समझा सकता। लेकिन तेनालीराम कुछ दिनों की छुट्टी लेकर नगर से बाहर चला गया था। 
एक दिन एक बूढ़ा व्यक्ति राजा कृष्णदेव राय के दरबार में रोता चलाता हुआ आ पहुंचा। राजा कृष्णदेव राय ने उसे सांत्वना देते हुए कहा तुम्हें क्या कष्ट है चिंता की कोई बात नहीं है। अब तुम राजा कृष्णदेव राय के दरबार में हो । तुम्हारे साथ पूरा न्याय किया जाएगा। 
में लुट गया महाराज आपने मेरे सारे जीवन की कमाई हड़प ली। मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं महाराजआप ही बताइए कि मैं उनका पेट भरूबूढ़ा व्यक्ति रोते हुए रोते हुए बोला । राजा कृष्णदेव राय ने पूछा क्या हमारे किसी सिपाही ने उन पर अत्याचार किया है हमें उसका नाम बताओकृष्णदेव राय ने क्रोध में कहा। नहीं महाराज में झूठी किसी कर्मचारी को क्यों बदनाम करो? वह बूढ़ा आदमी पर कराते हुए बोला। तो राजा कृष्णदेव राय ने उस बूढ़े आदमी से कहा तो क्या समस्या है?और यह सब क्या गोलमाल चल रहा है जल्दी बताओ कि तुम चाहते क्या हो?बूढ़े आदमी ने कहामहाराजअगर मुझे अभय दान मिलेतो बताऊंगा।राजा कृष्णदेव राय ने कहा कि हम तुम्हें अभयदान देते हैं।राजा कृष्णदेव राय ने उस बूढ़े आदमी को विश्वास दिलाया।
फिर वह बूढ़ा आदमी बोलने लगामहाराज कल रात मैंने सपने में देखाकि आप स्वयं कई मंत्रियों और कर्मचारियों के साथ मेरे घर पधारे हैंऔर मेरा संदूक उठाकर अपने अपने खजाने में जमा करने का आदेश दिया है।और उस संदूक में मेरे सारे जीवन की कमाई थी। 5000 स्वर्णमुद्र आए थे। उस बूढ़े व्यक्ति ने सिर झुकाते हुए कहा।
उस बूढ़े आदमी के बात सुनकर राजा कृष्णदेवराय बहुत क्रोधित हो गए।राजा कृष्णदेव राय ने कहा अजीब  मूर्ख आदमी हो तुम कहीं सपने भी सच हुआ करते हैं? बूढ़े आदमी ने उस पर तुरंत कहा आपने ठीक कहा है महाराज सपने कभी भी सच नहीं हुआ करते,सपने चाहे हवा में लटके अनोखे महल काही क्यों ना हो, सपने तो आखिर सपने होते हैं।और उसे महाराज ने ही क्यों ना देखा हो वह सच नहीं हो सकता। राजा कृष्णदेव राय हैरान होकर उस बूढ़े की तरफ देखने लगे। देखते ही देखते उस बूढ़े ने अपने नकली दाढ़ी मूछ और पगड़ी उतार दी राजा के सामने बूढ़े की स्थान पर तेनालीराम खड़ा था।इससे पहले कि राजा कृष्णदेव राय कुछ क्रोध में कह देते तभी तेनालीराम ने कहा महाराज आप मुझे अभय दान दे चुके हैं।
राजा कृष्णदेव राय हंस पड़े और उसके बाद उन्होंने अपनेसपनों के महल के बारे मेंकभी भी किसी से बात नहीं की।
और इसी तेनालीराम की चालाकी सेराजा को अपनी गलती का एहसास हो गया।राजा कृष्णदेव राय ने तेनालीराम कोखुश होकर 5000 स्वर्ण मुद्राएं दे दी।

२. पुरस्कार के अधिकारी

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विजय नगर के राजधानीमें रामलीला होती थी। रामलीला का मौसम आते ही कलाकारों की मंडली या सक्रिय होती थी। जगह-जगह जाते और कलाकार अभ्यास करने लगते।कहीं राम जी की सवारी निकालने की तैयारी शुरू होती तो कहीं श्रवण कुमार दशरथ नाटक का मंच तैयार होता।
सभी रामलीला मंडली को यू तो राज दरबार से प्रोत्साहन राशि मिल ही जाती थी।लेकिन इस बार राजा कृष्णदेव राय ने एक अलग ही घोषणा की। इस बार जो सबसे अच्छी रामलीला करेंगेउसे राज्य पुरस्कार दिया जाएगा । इसलिए एक समिति बनाई गई।
समिति में मंत्रीजी राजगुरु शामिल हो गए और तेनालीराम को जानबूझकर समिति में नहीं बुलाया गया।सही हुआ कि समिति जी राज पुरस्कार के लिए रामलीला का चुनाव करेगी।समिति के सदस्य जगह-जगह जाकर रामलीला देखने लगेऔर निश्चित दिन समिति ने राजा को बता दिया कि अमुक रामलीला सर्वश्रेष्ठ है। 
राजा कृष्णदेवराय तेनालीराम से कहा अब तुम एक समारोह का प्रबंध करोऔर इसी समारोह में उस रामलीला के मुख्य आकर्षण दिखाई जाएंगी और पुरस्कार भी दिया जाएगा पूर्णब्रह्म तेनालीराम ने भरे दरबार में कहा महाराज समिति में सर्वश्रेष्ठ रामलीला का चुनाव सचमुच बड़ी सूझबूझ से किया है। क्यों ना वह यह रामलीला सर्वश्रेष्ठ कलाकारों ने किया है। इस रामलीला मंडली वालों ने सदस्यों का भरपूर स्वागत किया है। उन्होंने रेशमी रेशमी शॉल के साथ चंदन की मूर्तियां दिए है।यह सुनकरराजा कृष्णदेव राय चौक गएऔर उन्हें समझ में आ गया कि इसी प्रलोभन के कारण उस राम मंडली को सर्वश्रेष्ठ ठहराया है।
राजा कृष्णदेवराय तेनालीराम से राय ली और वह बोले महाराज यह पुरस्कार तो बाल मंडली के रामलीला को मिलना चाहिए। पुरस्कार के प्रोत्साहन को पाकर बच्चे अगले वर्ष भी रामलीला उत्साह से करेंगे।इसी बहाने बच्चे भगवान राम केसद्गुणों से भी प्रणाली पाएंगे। सभी दरबारियों ने तेनालीराम की बात का समर्थन किया।अपने दाल नगर से देखकर राजपुरोहित सेनापति और मंत्री शर्म से पानी-पानी हो रहे थे।


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