तेनाली रमन हिंदी कहानिया | Tenali Raman story hindi | tenali raman hindi stories | जाड़े की मिठाई | जनता की अदालत

 Tenali Raman story hindi or tenaliraman hindi stories - तेनाली रमन हिंदी कहानिया हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। Tenali raman story - तेनाली रमन को तेनाली रामा के नाम से भी जाना जाता है। तेनाली रमन अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे।Tenali raman - तेनाली रमन हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार हिंदी कहानिया। यह कहानी को भी पढ़े  रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर 

जाड़े की मिठाई

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 एक बार राजमहल में राजा कृष्णदेवराय के साथ तेनालीराम और राजपुरोहित बैठे थे। जाड़े के दिन  थे। सुबह सुबह सुबह सुबह उठते हुए तीनों बातचीत करने में व्यस्त थे। 

तभी एकाएक राजा ने कहा जाड़े का मौसम सबसे अच्छा मौसम होता है। खूब खाओ और सेहत बनाओ। खाने के बाद शंकर पुरोहित के मुंह में पानी आ गया। राजपुरोहित बोला महाराज जाड़े में तो मेवा और मिठाई खाने का तो अपना ही मजा है।अपना ही आनंद है। अच्छा बताओ जाड़े की सबसे अच्छी मिठाई कौन सी है राजा कृष्णदेवराय ने पूछा? राजपुरोहित ने , मावा हलवा और बहुत सारी मिठाइयों का नाम लिया । 

राजा कृष्णदेव राय ने सभी मिठाईयां मंगवाई और पुरोहित से कहा जरा खाकर बताइए इनमें से सबसे अच्छी मिठाई कौन सी है। राजपुरोहित को तो सभी मिठाई अच्छी लगती थी तो इनमें से किस को सबसे अच्छा बताता वह समझ ना पाए । 

तेनालीराम ने कहा सब मिठाई अच्छे हैं लेकिन वह मिठाइयां नहीं  मिलेगी । राजा कृष्णदेव राय ने पूछा कौन सी मिठाई?  और इस मिठाई का नाम क्या है? नाम पूछ कर क्या करेंगे महाराज आप आज रात को मेरे साथ चलिए तो वह मिठाई में आपको खिला दूंगा तेनालीराम ने कहा । 

राजा कृष्णदेव राय मान गए और रात को साधारण भी पहन कर वह राजपुरोहित और तेनालीराम के साथ चले गए । चलते चलते वह काफी दूर निकल गए । दो तीन आदमी आग के सामने बैठकर कुछ  बातों में खोए हुए बातों में खोए हुए थे। यह तीनों भी वहां रुक गए पूर्णब्रह्म विश्वेश में लोग राजा को पहचान ना पाए। वहां से कोलू चल रहा था । तेनालीराम वहां चले गए और कुछ पैसे देख कर गरम-गरम गुड लेकर चला गए गुड लेकर वह राजा के पास आ गए । अंधेरे में तो राजा और राजपुरोहित जी को थोड़ा थोड़ा गुड़ देखकर बोले  लीजिए खाइए जाड़े की असली मिठाई । । 

राजा कृष्णदेव राय ने गरम-गरम गुड़ खाया तो बड़ा स्वादिष्ट लगा। राजा कृष्णदेव राय बोले वाह इतनी  इतनी बढ़िया मिठाई अंधेरे में कहां से आई? तभी तेनालीराम को एक कोने में पड़ी पत्तियां दिखाई दी। वह अपनी जगह छोटा और कुछ पत्तियां इकट्ठा करके आग लगा दी पूर्णाराम फिर बोला महाराज यह गुड है। राजा कृष्णदेव राय ने पूछा गुड और इतना स्वादिष्ट?  सभी तेनालीराम ने कहा महाराज जाटों में तो असली स्वाद गर्म चीजों में रहता है  । वह गुड गर्म है इसलिए स्वादिष्ट है। तेनालीराम की यह बात सुनकर राजा कृष्णदेव राय मुस्कुरा उठे। और राजपुरोहित अभी भी चुप था ।

जनता की अदालत

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एक दिन राजा कृष्णदेव राय शिकार के लिए गए। वह जंगल में भटक गए। दरबारी पीछे छूट गए। शाम होने को ही थी। उन्होंने घोड़ा एक पेड़ से बांधारात पास के एक गांव में बिताने का निश्चय किया।और भेस बदलकर एक किसान के पास चले गए।

किसान से कहाबहुत दूर से आया हूं मैंरात को आश्रय मिल सकता है? किसान बोला आओ जो रुखा सुखा हम खाते हैं वह आप भी खाएगा। मेरे पास एक पुराना कंबल है।क्या उसमें जाड़ेकी रात आप काट सकेंगे? राजा कृष्णदेव राय ने कहा क्यों नहीं और फिर सिर हिलाया।

रात को राजा गांव में घूमेने निकला तो राजा कृष्णदेवराय को दिखा की गांव में भयानक गरीबी थी। उन्होंने किसान से पूछा तुम दरबार में जाकर बात क्यों नहीं करते? किसने कहा कैसे जाए राजा तो चारों ओर से चापलूसी से घिरे हुए।कोई हमें दरबार में जाते ही जाने ही नहीं देता।

सुबह राजधानी लौटते ही राजा कृष्णदेवराय ने सभी मंत्रियों और दरबारियों को बुलाया।और उनसे कहा हमें पता चला है कि हमारे राज्यों की गांव की हालत ठीक नहीं है तुम गांव के भलाई के काम करने के लिए खजाने से काफी रुपया ले चुके हो क्या उसका? मंत्री बोला महाराज सारा रुपया गांव के भलाई  में ही खर्च हुआ है।। आपको किसी ने गलत कहा है।
मंत्री के जाने के बाद उन्होंने तेनालीराम को बुलाया।और कल की पूरी घटना सुनाई तेनालीराम ने कहा महाराज के दरबार में नहीं आएगी अब आपको ही उनके दरबार में जाना होगा पूर्ण एवं उनके साथ जो अन्याय हुआ है उनका फैसला उन्हीं के पीछे जाकर कीजिए ।
अगले ही दिन राजा ने राज दरबार में घोषणा की कल से हम गांव गांव जाएगे यह देखने के लिए कि जनता किस हालत में है। राजा कृष्णदेव राय की घोषणा सुनते ही एक मंत्री ने कहा महाराज लोग खुशहाल है आप चिंता ना करें जाड़े में बेकरी परेशान होंगे।तेनालीराम बोला मंत्री जी आपसे ज्यादा प्रजा का भला जानने वाला कौन होगा यह जो भी कह रहे हैं वह सच होगामगर आप भी तो प्रजा की खुशहाली देखिए।
अगले दिन जब राजा कृष्णदेव राय प्रजा का हित जानने के लिए बाहर निकले तभी मंत्री ने आस-पास के गांव देखने के लिए कहा पर राजा ने दूर-दराज के गांव के तरफ घोड़ा मोड़ दिया।
जैसे ही राजा कृष्णदेव राय उस गांव में चले गए तो राजा को सामने पाकर लोग खुलकर अपने समस्याओं को बताने लगे। मंत्री के कारनामा का सारा भेद खुल चुका था। वह सिर झुकाए हुए खड़ा हुए राजा ने घोषणा करवा दी अब हर महीने कम से कम एक बार मैं खुद जाकर आपके बीचजाकर आपकी समस्या सुन लूंगा और उनका समाधान करूंगा। सारे लोग खुश हो गए और राजा को खूब सारी दुआएं देने लगे।

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