तेनाली रमन हिंदी कहानिया | Tenali Raman story hindi | tenali raman hindi stories | तेनाली एक योद्धा

 Tenali Raman story hindi or tenaliraman hindi stories- तेनाली रमन हिंदी कहानिया हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। Tenali raman story- तेनाली रमन को तेनाली रामा के नाम से भी जाना जाता है। तेनाली रमन अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे।Tenali raman - तेनाली रमन हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार हिंदी कहानिया। यह कहानी को भी पढ़े  रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर  


तेनाली एक योद्धा

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 एक बार  एक प्रसिद्ध योद्धा उत्तर भारत से विजयनगर आया पूर्ण मेरा उसने कहीं युद्ध तथा पुरस्कार जीते हुए थे। इसके वितरित अतिरिक्त उसने अपनी पूरी जिंदगी में कभी भी पराजित नहीं हुआ था। 
विजयनगर आकर विजय नगर के बड़े-बड़े योद्धाओं को युद्ध के लिए पुकारा। उसके लंबे कटीले और शक्ति ले शरीर के सामने विजय नगर  का कोई भी योद्धा टिक नहीं पाया। 
विजय नगर की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी। और इसी बात पे नगर के सभी योद्धा बहुत चिंतित थे। बाहर से आया हुआ एक योद्धा पूरा विजयनगर को ललकार रहा था। और विजय नगर में इतने बड़े बड़े योद्धा होने के बावजूद वह कुछ भी नहीं कर पा रहे थे। और वह सब कुछ भी नहीं कर पा रहे थे। 
अतः वह सभी योद्धा इस समस्या को हल निकालने के लिए तेनालीराम के पास चले गए । उनकी बात बड़े ध्यान से सुनने के बाद तेनालीराम बोले सचमुच यह एक बहुत बड़ी समस्या है। परंतु उस योद्धा को कोई योद्धा ही हरा सकता है। और मैं कोई योद्धा भी नहीं हूं मैं तो सिर्फ एक विदूषक हूं मैं इसमें आपकी क्या सहायता कर सकता हूं? तेनालीराम की यह बात सुनकर मुझे नगर के सभी योद्धा बहुत चिंतित हो गए । क्योंकि उनकी एकमात्र आशा तेनालीराम ही था। 
विजयनगर के सारे योद्धा जब वह निराश होकर जाने लगे तो तेनालीराम ने उन्हें रोककर कहा। में उत्तर भारत के वीर योद्धा से  युद्ध करूंगा और उसे हराऊंगा लेकिन तुम सबको मुझे एक वचन देना होगा कि जैसा मैं कहूंगा वैसा ही तुम लोगों को करना होगा। विजय नगर के सारे योद्धा ने तुरंत वचन दे दिया । 
तभी तेनालीराम बोला शक्ति परीक्षण के दिन तुम सभी तुम सभी पदक पहन लेना और उस योद्धा से मेरा परिचय अपने गुरु के रूप में ही कराना । और मुझे अपने कंधे पर बैठा कर ले कर जाना। विजयनगर के योद्धा ने तेनालीराम को ऐसा ही करने का आश्वासन दे दिया।
 निश्चित दिन के लिए तेनालीराम ने योद्धाओं को एक नारा भी याद करने के लिए कहा। जो कि इस प्रकार था।  "महमूद महाराज की जय नेस मुमाद की जय " । तेनालीराम ने कहा जब तुम मुझे कंधे पर बैठाकर युद्ध भूमि में जाओगे सब सभी नारे जोर जोर से बोलना। 
अगले ही दिन युद्ध भूमि में जोर-जोर से नारे लगाते हुए योद्धाओं की ऊंची आवाज सुनकर उत्तर भारत का योद्धा सोच में पड़ गया। विजयनगर का अवश्य ही कोई महान योद्धा आ रहा है। 
नारा कन्नड़ भाषा का साधारण श्लोक था। जिसमें मामुक का अर्थ था धूल चटाना। और देश का अर्थ भी कुछ ऐसा ही था।  
सारी युद्धभूमि उस नारे गूंजने लगी। उत्तर भारत की योद्धा को वह भाषा और नारा समझ में नहीं आ रहा था। अंततः उसने सोचा कि कोई महान योद्धा रहा है तेनालीराम उत्तर भारत के  योद्धा के पास आ गया और बोला इससे पहले में तुम्हारे साथ ही युद्ध करो तुम्हें मेरे हावभाव का अर्थ बताना होगा । दरअसल प्रत्येक महान योद्धा को इन  हाव भाव का अर्थ का ज्ञान होना चाहिए। अगर तुम मेरे हवाओं का अर्थ बता  दोगे तभी मैं तुमसे युद्ध करूंगा। यदि तुम मेरे हाव भाव का अर्थ बता नहीं सके तो आपने पराजय स्वीकार करनी पड़ेगी। 
इतने बड़े-बड़े योद्धाओं को देखकर जो कि तेनालीराम को कंधों पर उठाकर लेकर आए थे । और उसे अपना गुरु बता रहे थे। और जोर-जोर से नारे भी लगा रहे थे। वह योद्धा सोचने लगा अवश्य ही तेनालीराम कोई बहुत बड़ा योद्धा है । 
उत्तर प्रदेश के आए योद्धा ने तेनालीराम की बात स्वीकार कर ली और उसके बाद तेनालीराम ने संकेत देने का आरंभ किया। तेनालीराम ने अपना दाया पैर आगे करके उस योद्धा के छाती को  छुआ और अपने बाएं हाथ से अपने बदन को छुआ पश्चात अपने बाएं हाथ को दाएं हाथ पर रखकर जोर से उसे दबा दिया । उसके बाद अपनी तर्जनी से दक्षिण दिशा की ओर संकेत किया। फिर उसने अपने दोनों हाथों की तर्जनी की उंगलियां एक गांठ बनाई तत्पश्चात एक मुट्ठी मिट्टी उठाकर हवा में डालने का अभिनय किया। तत्पश्चात तेनालीराम ने उत्तर भारत के योद्धा को इन हवाओं को समझाने के लिए कहा। परंतु वह योद्धा कुछ समझ नहीं पाया। इसलिए उसने अपनी पराजय स्वीकार कर ली। वह विजयनगर से चला गया और जाते-जाते अपने सभी पदक और पुरस्कार तेनालीराम को दे गया। 
विजयनगर के राजा और प्रजा प्रीति के बदलते ही अचंभित हो गए। सभी योद्धा बिना युद्ध किए ही जितने से बहुत प्रसन्न थे। 
राजा कृष्णदेवराय तेनालीराम को बुलाकर पूछा तेनालीराम उन हावभाव का  क्या मतलब है?  और तुमने क्या चमत्कार किया?  तभी तेनालीराम बोला महाराज इसमें कोई चमत्कार नहीं था।  यह मेरी योद्धा को मूर्ख बनाने की योजना थी। मेरे हाव भाव के अनुसार वह योद्धा उसी प्रकार शक्तिशाली था। जिस प्रकार किसी का दाया हाथ शक्तिशाली होता है। और उसके सामने बाए हाथ निर्बल होता है। यदि दाएं हाथ के सामने शक्तिशाली योद्धा बाएं हाथ के समान निर्बल योद्धा को युद्ध के लिए ललकारेगा तो तो निर्मल योद्धा तो  सीधे-सीधे ही कुचल दिया जाएगा। और यदि मैं युद्ध करता तो दक्षिण दिशा में बैठी मेरी पत्नी को अपमान की धूल खानी पड़ती । मेरे हावभाव को केवल यही आशा दिया था मैंने। जिससे वह समझ नहीं पाया। तेनालीराम का यह जवाब सुनकर राजा जोर-जोर से टांका लगाने लगा और जोर जोर से हंस पड़े ।

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