तेनाली रमन हिंदी कहानिया | Tenali Raman story hindi | tenali raman hindi stories | तपस्या का सच | राज्य में उत्सव

Tenali Raman story hindi or tenaliraman hindi stories - तेनाली रमन हिंदी कहानिया हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। Tenali raman story - तेनाली रमन को तेनाली रामा के नाम से भी जाना जाता है। तेनाली रमन अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे।Tenali raman - तेनाली रमन हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार हिंदी कहानिया। यह कहानी को भी पढ़े  रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर 

 १ तपस्या का सच

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Tenali Raman story hindi


 विजयनगर राज्य में बड़ी जोरदार ठंड पड़ रही थी राजा कृष्णदेव राय के दरबार में ठंड की बहुत चर्चा हुई ।  पुरोहित ने महाराज को समझाया  महाराज यदि इन दिनों यज्ञ किया जाए तो उसका फल उत्तम होगा दूर-दूर तक उड़ता हुआ और उसका दवा सारे वातावरण को स्वच्छ और पवित्र कर  देगा। सारे दरबारियों ने एक स्वर में कहा बहुत उत्तम सुझाव है पुरोहित जी का महाराज को ही सुझाव पसंद आएगा । दरबारियों ने एक स्वर में कहा ।
 महाराज कृष्ण देव राय बोली ठीक है आप आवश्यकता के अनुसार हमारे  सरकारी खजाने से धन प्राप्त कर सकते हैं । महाराज यह महान यज्ञ 7 दिन तक चलेगा कम से कम 100000 स्वर्ण मुद्राओं का खर्च हो जाएगा । प्रतिदिन सुबह सूर्योदय से पहले मैंने देखे थे चल में खड़े होकर तपस्या करूंगा और देवी-देवताओं को परेशान करूंगा । और अगले ही दिन से शुरू हो जाएगा । एशिया में दूर-दूर से हजारों लोग आते और ढेरों प्रसाद बांटते हैं ।
 पुरोहित जी यज्ञ से पहले सुबह सवेरे कड़कड़ाती ठंड में ठंड में खड़े होकर तपस्या करते हैं । देवी देवताओं को लोग यह सब देख कर आश्चर्यचकित हो जाते।  

राजा कृष्णदेव राय  सुबह सवेरे पुरोहित जी की तपस्या करते हुए देखने के लिए चले गए। उनके साथ तेनालीराम भी था । ठंड इतनी थी कि  दांत बज रहे थे। ऐसे में पुरोहित जी नदी के ठंडे पानी में खड़े होकर तपस्या कर रहे थे । अद्भुत करिश्मा है । कितना कठिन तपस्या है यह हमारे पुरोहित जी राज्य की भलाई के लिए उन्होंने इतनी चिंता जताई है । वह तो है ही जरा पास चल कर देखते हैं पुरोहित जी को तेनालीराम ने कहा । 

राजा कृष्णदेव राय  बोले लेकिन पुरोहित जी ने तो यह कहा है कि तपस्या करते वक्त उनके पास कोई भी ना आए । इसे उनके तपस्या में विघ्न पैदा होगा । तो हमारा आज हम दोनों ही कुछ देर तक उनके प्रतीक्षा कर लेते हैं जो पुरोहित जी तपस्या खत्म करके ठंडे पानी से बाहर आ जाएंगे तो फल फूल देकर उनका सम्मान करेंगे राजा कृष्णदेव राय को तेनालीराम की यह बात जच गई। वह दूर बैठकर पुरोहित जी की तपस्या देखने लगे । काफी समय हो गया लेकिन पुरोहित जी ने ठंडे पानी से बाहर निकलने का नाम तक नहीं लिया। 

तभी तेनालीराम  बोल उठा अब समझ में आया लगता है ठंड के वजह से पुरोहित जी का शरीर अकड़ गया है इसलिए शायद उन्हें पानी से बाहर आने में कष्ट हो रहा है । इनकी सहायता करता हूं । तेनालीराम नदी की ओर चला गया । और  राजपुरोहित जी का हाथ पकड़ कर बाहर खींच लाया । 

पानी से बाहर आते ही राजा हैरान हो गए । उनकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था । वह बोले अरे पुरोहित जी आपके तपस्या का चमत्कार देखो इनके कमर के नीचे से सारा शरीर नीला हो गया । तेनालीराम हंसकर बोला यह कोई चमत्कार नहीं है महाराज यह देखिए सर्दी से बचाव के लिए थोड़ी चीनी धोती के नीचे जलरोधक पजामा पहन के रखा है । राजा कृष्णदेव राय हंस पड़े और तेनालीराम को साथ लेकर अपने महल की ओर चल पड़े । 
 राजपुरोहित तेनालीराम और राजा कृष्णदेव राय को अपने महल की ओर  जाते हुए देखते रह गए ।


२ राज्य में उत्सव

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 एक बार राजा कृष्णदेवराय ने अपने दरबारियों से कहा नया वर्ष आरंभ होने वाला है। मैं चाहता हूं नए वर्ष पर जनता को कोई नई भेंट दी जाए । नया तोहफा दिया जाए । आप बताइए वह भेट क्या हो?  और वह तोफा क्या हो?  सभी दरबारी सोच में पड़ गए तभी एक मंत्री ने कहा महाराज नए वर्ष पर राजधानी में एक शानदार उत्सव मनाया जाए देशभर में संगीतकार नाटक  मंडलीयऔर दूसरे कलाकारों को बुलाया जाए । और वह रंग बिरंग कार्यक्रम प्रस्तुत करें । जनता के लिए इससे बढ़कर नए वर्ष का उपहार क्या हो सकता था ।
 राजा कृष्णदेवराय को यह सुझाव बहुत पसंद आया उन्होंने मंत्री महोदय से पूछा कितना खर्चा आ जाएगा इस पूरे आयोजन का?  महाराज कोई खास ज्यादा नहीं यह  कोई 10-20 लाख स्वर्ण मुद्राएं ही खर्च हो महाराज मंत्री महोदय ने उत्तर दिया । राजा कृष्णदेव राय ने पूछा इतना सारा खर्च कैसे?  राजा कृष्णदेव राय महामंत्र का उत्तर सुनकर  चौक  पढ़े । फिर मंत्री महोदय ने  उत्सव का ब्यौरा देते हुए कहा महाराज हजारों कलाकार के खाने-पीने और रहने का प्रबंध करना होगा । नई रंगशाला बनाई जाएगी । पुरानी रंगशाला ओं की मरम्मत करानी होगी । शहर भर में रोशनी और सजावट होगी । इन सब चीजों पर इतना खर्चा तो हो ही जाएगा। मंत्री के दौरे पर राजपुरोहित और दरबार के अन्य सदस्यों ने हां में हां मिलाई । 

राजा कृष्णदेव राय इतनी खर्च के बाद सुनकर सोच में पड़ गए उन्होंने इस बारे में तेनालीराम की राय ली तेनालीराम ने कहा महाराज उत्सव का विचार तो वास्तव में बहुत अच्छा है । मगर यह उत्सव राजधानी में नहीं होना चाहिए । क्यों? राजा कृष्णदेव राय ने पूछा । दूसरे सारे दरबारी भी तेनालीराम की ओर गुस्से से देखने लगे । महाराज उत्सव यदि केवल राजस्थानी में हो तो शेष राज्यों की जनता का उस आनंद लेने का मौका चला जाएगा । गांव वाले अपना गांव छोड़कर तो यह उत्सव देखने के लिए नहीं  आएंगे । कलाकारी और को राज्य का प्रत्येक गांव राज्य का प्रत्येक गांव और कस्बे में जाकर जनता का मनोरंजन करना चाहिए । कलाकारों की कला जनता का मनोरंजन करना है । कलाकारों की कला के माध्यम से जनता अपनी संस्कृति अपने इतिहास को  जानेगी । तथा कलाकार संस्कृति की धरोहर रखने वाले से परिचित होंगे। साथी कलाकारों का स्वागत सत्कार गांव वाले करेंगे ।
 यह सब बातें सुनकर राजा कृष्णदेव राय ने कहा तेनालीराम तुम्हारी बात बिल्कुल ठीक है । इसके लिए जितना धन चाहिए वह खजाने से ले लो । धन किसलिए? यह तो जनता स्वयं खर्च करेगी होली के लिए तो यह सब कर रहे हैं । इस उत्सव का नाम मिलन मेला होगा इस समय कलाकार जहां कहीं भी जाएंगे उनके खाने-पीने और रहने का प्रबंध वह लोग बिना कुछ कहे कर देंगे। हां आने जाने का प्रबंध हम कर देंगे इस तरह बहुत कम खर्चों में सारा उत्सव हो जाएगा महाराज  । मगर इस उत्सव मिलन मेले में आनंद भी उठा पाएंगे । 

राजा कृष्णदेव राय को तेनालीराम की यह बात समझ गए उन्होंने उत्सव का सारा काम तेनालीराम को सौंप दिया । आयोजन की आड़ में अपना स्वार्थ सिद्ध करने वाले मंत्र और अन्य सभासद दो के चेहरे उतर गए ।


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1 comment:

  1. Very nice story... Please upload more Tenalirama hindi stories.

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