तेनाली रमन हिंदी कहानिया | Tenali Raman story hindi | tenali raman hindi stories | रंग बिरंगी मिठाइयां | रंग-बिरंगे नाखून


Tenali Raman story hindi or tenaliraman hindi stories - तेनाली रमन हिंदी कहानिया हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। Tenali raman story - तेनाली रमन को तेनाली रामा के नाम से भी जाना जाता है। तेनाली रमन अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे।Tenali raman - तेनाली रमन हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार हिंदी कहानिया। यह कहानी को भी पढ़े  रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर 

  १. रंग बिरंगी मिठाइयां

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 वसंत ऋतु छाई हुई थी। राजा कृष्णदेव राय बहुत ही प्रसन्न थे। वह तेनालीराम के साथ बाग में टहल रहे थे। पूर्णविराम वह चाह रहे थे। कि ऐसा उत्सव मनाया जाए जिसमें उनके राज्य के सारे लोग सम्मिलित हो। पूरे राज्य को उत्सव मनाने का आनंद मिल सके। 
इस विषय में राजा कृष्णदेवराय तेनालीराम की भी राय लेना चाहते थे। तेनालीराम ने राजा को सोच की प्रशंसा की और इस प्रकार विजय नगर में राष्ट्रीय उत्सव मनाने का आदेश दिया गया । 
शीघ्र ही नगर को स्वच्छ करवा दिया गया। सड़कों इमारतों पर रोशनी की गई। पूरे नगर को फूलों से सजाया गया। सारे नगर में उत्सव का वातावरण आ गया। इसके बाद राजा ने घोषणा की राष्ट्रीय उत्सव मनाने के लिए मिठाइयों के दुकानों पर रंग बिरंगी मिठाई बनादियी जाये । 
राजा कृष्णदेव राय के घोषणा के बाद मिठाई के दुकान में दुकान वाले मिठाई बनाने में व्यस्त हो गए। कई दिनों से तेनाली राम दरबार में नहीं आ रहे थे। 
राजा ने तेनालीराम को ढूंढने के लिए सिपाहियों को भेजा परंतु वह भी तेनालीराम को ढूंढना पाए। उन्होंने राजा को इस विषय में सूचित किया। राजा कृष्णदेवराय को बहुत चिंता होने लगी उन्होंने तेनालीराम को सतर्कता पूर्वक निकाल दिया। 
कुछ दिनों बाद सैनिकों ने तेनालीराम को ढूंढ निकाला। सिपाही वापस आकर आजा को बोले महाराज तेनालीराम ने कपड़ों को रंगने की दुकान खोली है। पूनम सारे दिन अपने काम में व्यस्त रहते हैं। उसे अपने साथ आने के लिए कह रहे थे। तो तेनालीराम ने मना कर दिया। 
हाराज सिपाहियों की यह बात सुनकर राजा क्रोधित हो गए। मैं तुम्हें आदेश देता हूं कि तेनालीराम को जल्द से जल्द पकड़ कर यहां लेकर आओ। यदि वह तुम्हारे साथ ना आए तो उसे बलपूर्वक लेकर आओ। 
राजा कृष्णदेव राय के आदेश का पालन करते हुए सैनिक तेनालीराम को सम्मान पूर्वक पकड़कर दरबार में लेकर आए । राजा कृष्णदेव राय ने पूछा तेनाली तुम्हें लाने के लिए जब मैंने सैनिकों को भेजा तो तुमने  शाही आदेश का पालन क्यों नहीं किया?  तथा तुमने रंगरेज की दुकान क्यों खोली है?  राजा कृष्णदेव राय ने कहा हमारे दरबार में तुम्हारा बहुत अच्छा स्थान है जिससे तुम सारी आवश्यकता पूर्ण कर सकते हो फिर भी तुमने रंगरेज की दुकान क्यों खोली है? तेनालीराम ने कहा महाराज मैं राष्ट्रीय उत्सव के लिए अपने वस्त्रों को रंगना चाहता था। इससे पहले कि सारे रंगों का प्रयोग दूसरे कर ले मैं रंगाई का कार्य पूरा कर लेना चाहता था । सभी रंगों से मतलब तुम्हारा क्या तात्पर्य है? राजा कृष्णदेव राय ने पूछा। 
तेनालीराम बोला नहीं महाराज आपने जो मिठाइयों को रंगने का आदेश दिया था। उसके पश्चात सभी मिठाई बनाने वाले मिठाई को रंगने के लिए रंग खरीद  नेमी व्यस्त हो गए । यदि वह सारे रंगों को मिठाई रंगने में लगा दिए तो वह मेरे वस्त्र कैसे रंगे । इस प्रकार राजा को अपने गलती का एहसास हो गया । वह बोले तो तुम यह कहना चाहते हो कि मेरा आदेश है और मेरे आदेश का लाभ उठाकर मिठाई बनाने वाले मिठाई को रंगने के लिए घटिया और हानिकारक रंगों का प्रयोग कर रहे हैं? उन्हें केवल खाने के योग्य के रंगों का प्रयोग करना चाहिए । इतना कहकर महाराज राम कथा तेनालीराम के चेहरे पर मुस्कुराहट थी । 
राजा कृष्णदेव राय ने आदेश दिया जो भी मिठाई वाले रासायनिक रंगों का उपयोग करेगा उन्हें कठोर से कठोर दंड दिया जाएगा ।
 इस प्रकार तेनालीराम ने अपने बुद्धि का इस्तेमाल करके फिर विजयनगर कि लोगों की रक्षा की ।

२. रंग-बिरंगे नाखून

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 सभी जानते थे कि राजा कृष्णदेव राय पशु पक्षियों से बहुत प्यार करते थे । एक दिन एक बहेलिया राज दरबार में आ गया उसके पास पिंजरे में एक सुंदर एवं चित्र रंग का पक्षी था वह राजा से बोला महाराज ही सुंदर और विपक्षी को मैंने पर जंगल से पकड़ा है यह बहुत मीठा गाता है तथा तोते के समान बोल सकता है। मोर के समान रंग बिरंगी ही नहीं है बल्कि उसके समान नाच हो सकता है। मैं यहां यह पक्षी आप को बेचने के लिए आया हूं । 
राजा ने पक्षी को देखा और बोले यह पक्षी रंगबिरंगा और बहुत ही रहे इसके लिए मूल्य मिल जाएगा।राजा कृष्णदेव राय ने बहेलिया को 50 स्वर्ण मुद्राएं दे दी।और उस पक्षी को अपने महल के बगीचे में रखने का आदेश दे दिया। अभी तेनालीराम अपने स्थान से उठा और बोला महाराज मुझे नहीं लगता कि यह पक्षी बरसात में मोर के समान नृत्य कर सकता है। 
तेनालीराम ने कहा बल्कि मुझे तो लगता है कि यह पक्षी कई वर्षों से नहाया ही नहीं। तेनालीराम की बात सुनकर बहेलिया डर गया। और दुखी स्वर में राजा से बोला महाराज में एक निर्धन बहेलिया हूं । पक्षियों को पकड़कर बेचना में मेरी आजीविका है । मैं समझता हूं कि पक्षियों को और उनके बारे में बिना किसी जानकारी के आरोप लगाना अनुचित है। यदि मन हो तो कहते जी को मेरा मजाक उड़ाने का  और मुझे झूठा कहने का अधिकार मिल गया है?  बताइए महाराज बताइए?  
बहेलिया की यह बात सुनकर राजा कृष्णदेवराय तेनालीराम से अप्रसन्न होते हुए बोले  तेनालीराम तुम्हें ऐसा कहना शोभा नहीं देता।  क्या तुम अपनी बात  सिद्ध कर सकते हो?  हां महाराज में करना चाहता हूं यह कहते हुए तेनालीराम एक गिलास पानी पक्षी के पिंजरे में गिरा दिया । पक्षी गीला हो गया और सभी दरबारी पक्षियों को आश्चर्य से देखने लगे पक्षी पर गिरा पानी रंगीन हो गया और उसका रंग हल्का बुरा हो गया । राजा तेनालीराम को आश्चर्य से देखने लगे तेनालीराम बोला महाराज यह कोई विचित्र पक्षी नहीं है बल्कि जंगली कबूतर है । 
राजा कृष्णदेव राय ने पूछा लेकिन तुम्हें कैसे पता चला?  यह पक्षी रंग आ गया है?  महाराज पहेलियों के रंगे हुए नाखूनों से मुझे पता चला तेनालीराम ने कहा । 
पक्षी पर लगे हुए रंग तथा उसके नाखूनों के रंग एक जैसे ही है। अपनी पोल खुलते देख बहेलिया भागने का प्रयास करने लगा परंतु सैनिकों ने उसे पकड़ लिया राजा कृष्णदेव राय ने उसे धोखा देने की अपराध में जेल में डाल दिया। और उसे दिया गया पुरस्कार 50 स्वर्ण मुद्राएं तेनालीराम को दे दी गई । तो इस प्रकार तेनालीराम ने फिर एक बार  राजा कृष्णदेव राय को बचा लिया । 

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