तेनाली रमन हिंदी कहानिया | Tenali Raman story hindi | tenali raman hindi stories | हाथियों का उपहार | तेनालीराम की घोषणा

Tenali Raman story hindi or tenaliraman hindi stories - तेनाली रमन हिंदी कहानिया हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। Tenali raman story - तेनाली रमन को तेनाली रामा के नाम से भी जाना जाता है। तेनाली रमन अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे।Tenali raman - तेनाली रमन हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार हिंदी कहानिया। यह कहानी को भी पढ़े  रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर 

१. हाथियों का उपहार

Tenali-Raman-story-hindi
Tenali Raman story hindi

राजा कृष्णदेव राय समय-समय पर तेनालीराम को बहुमूल्य उपहार देते रहते थे। एक बार प्रसन्न होकर राजा ने तेनालीराम को पांच हाथी उपहार में दिए। ऐसे उपहार को पाकर तेनालीराम बहुत परेशान हो गया। निर्धन होने के कारण तेनालीराम पांच - पांच हाथियों के खर्चे को कैसे उठा पाता? क्योंकि उन्हें खिलाने के लिए बहुत से अनाज की आवश्यकता होती थी। तेनालीराम अपने परिवार का ही ठीक ठाक तरीके से पालन पोषण नहीं कर पा रहा था। और हाथियों का अतिरिक्त वभर उसके लिए भी अत्याधिक कठिन था। फिर भी अधिक विरोध किए बिना तेनालीराम ने हाथियों को शाही उपहार के रूप में स्वीकार कर घर ले आया।  

घर पर तेनालीराम की पत्नी सदैव शिकायत करती रहती। हम अपने घर का स्वयं ठीक से ख्याल नहीं रख पा रहे हैं। फिर इन हाथों के लिए कहा रहने की व्यवस्था करें? 

इन हथियोके लिए कोई नौकर नहीं रख सकते हम। अपने लिए तो जैसे तैसे भोजन की व्यवस्था कर पाते हैं। परंतु इसके लिए हमें 5 हाथियों के स्थान पर पांच गए भी दे देते तो कम से कम उनके दूध से हमारा भरण-पोषण तो होता।  
तेनालीराम की हिंदी कहानी रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर 

तेनालीराम जानता था कि उसकी पत्नी सत्य कह रही हैं। कुछ देर सोचने के बाद उसने हाथों से पीछा छुड़ाने की योजना बना ली। वह उठा और बोला मैं पहले इन हाथों को देवी काली को समर्पित कर देता हूँ। 

तेनालीराम काली मंदिर गया और वहां उसने उनके माथे पर तिलक लगाया। इसके बाद हथियोंको नगर में घुमाने के लिए छोड़ दिया। कुछ दयावान लोग हाथियों को खाना खिला देते परंतु अधिकतर समय भूखे ही रहते। 
कुछ दिन बाद हाथी निर्बल हो गए। किसी ने हाथियों की दुर्दशा के विषय में राजा को सूचना दी। राजा हाथियों के प्रति तेनालीराम के इस व्यवहार से प्रसन्न हो गए। उन्होंने तेनालीराम को दोबारा बुलाया और पूछा तुमने हाथियों के साथ दुर्व्यवहार क्यों  किया

तेनालीराम ने कहा क्योंकि आपकी आज्ञा के अनुसार मैंने हथियोंको स्वीकार कर दिया क्यों की उन्हें न स्वीकार करने से आपका अपमान होता। यह सोचकर मैंने उन हाथों को स्वीकार कर लिया। परंतु यह उपहार मेरे ऊपर एक बोझ बन गया। क्योंकि मैं एक निर्धन व्यक्ति हूं। मैं 5 हाथियों की देखभाल का अतिरिक्त भार नहीं उठा सकता। तेनालीराम ने कहा आप मुझे हाथियों के बदलेमे ५ गए देते तो मेरे परिवार के लिए उपयोगी साबित होती।  

राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ वह बोले  यदि मैं तुम्हें 5 गाय देता तभी तब तुम उनके साथ भी ऐसा ही दुर्व्यवहार करते? तेनालीराम ने कहा नहीं महाराज गाय तो पवित्र जानवर है। और फिर गाय का दूध मेरे बच्चे के पालन पोषण के काम आता उल्टे इसके लिए तो आपको मैं धन्यवाद देता। और आपकी दया से मैं गाय के पालन पोषण का भार भी उठा सकता हूं। 

राजा ने तेनालीराम से हाथियों को वापस ले लिए और ासको गए तथा उनके पालन पोषण का खर्च भी उपहार में दी दिया।  



२. तेनालीराम की घोषणा

Tenali-Raman-story-hindi
Tenali-Raman-story-hindi
एक बार राजा कृष्णदेव राय से पुरोहित ने कहा महाराज हमें अपनी प्रजा के साथ सीधे जोड़ना चाहिए।  पुरोहित की बात सुनकर सभी दरबारी चौक पड़े वे पुरोहित की बात समझ ना पाए। तब पुरोहित ने अपनी बात को समझाते हुए उन्हें बताया दरबार में जो भी चर्चा होती है हर सप्ताह उस चर्चा की प्रमुख बातें जनता तक पहुंचाई जाए। प्रजा भी उन बातों को जाने। 
मंत्री ने कहा महाराज विचार तो वास्तव में बहुत उत्तम है। तेनालीराम से अधिक चतुर व्यक्ति हमारे राजदरबार में नहीं है इसलिए इस कार्य को सुचारू रूप से  तेनालीराम ही कर सकते हैं।  साथ ही तेनालीराम पर दरबार की विशेष जिम्मेदारी भी नहीं है। 
यह तय हुआ राजा ने मंत्री की बात मान ली और तेनालीराम को यह काम सौंप दिया। तय किया तेनालीराम को राज दरबार में प्रजा के हित में जो बातें होती है वह जो राजदरबार में होनेवाली सभी बाते लिखित रूप से दरोगा को देंगे। और दरोगा नगर के चौराहे पर मुनादी की सहयता लेकर जनता और प्रजा को उन बातों की सूचनाएं देंगे। 
तेनालीराम सारी बात समझ गया वह यह भी समझ गया कि मंत्री ने उसे जबरदस्ती फंसाया है। तेनालीराम ने भी अपने मन में एक योजना बनाएं। सप्ताह के अंत में उससे मुनादी करने के लिए दरोगा को एक पर्चा थमा दिया। दरोगा ने पर्चा मुनादी वाले को पकड़ा कर कहा जा और मनादी दे दो। 
मुनादी वाला सीधा चौराहे पर पहुंचा और ढोल पीट-पीटकर मुनादी करते हुए बोला सुनोSS सुनोSS सुनोSS... नगर के सारे नागरिकों सुनोSS महाराज चाहते हैं की, दरबार में जनहित के लिए जो फैसले किए गए हैं उन्हें सारे नगरवासी जाने, उन्होंने श्रीमान तेनालीराम को यह कठिन काम सौंपा है। हम उनाकी आज्ञा से आपको यह समाचार सुना रहे हैं। धन्यवाद! देकर सुनो....
महाराज चाहते हैं कि प्रज्ञा और जनता के साथ पूरा न्याय हो अपराधी को दंड मिले। इस मंगलवार को राजदरबार में इसी बात को लेकर काफी गंभीर चर्चा हुई। महाराज चाहते हैं कि पुरानी न्याय व्यवस्था की अच्छी और साफ-सुथरी बातें भी इस न्याय प्रणाली में शामिल हो जाए। इस विषय में उन्होंने पुरोहित जी से न्याय व्यवस्था के बारे में जानना चाहा किंतु पुरोहित जी इस बारे में कुछ ना बता सके क्योंकि वह दरबार में बैठे सो रहे थे। उन्हें इस दशा में देखकर राजा कृष्णदेव राय को गुस्सा गया उन्होंने भरे दरबार में पुरोहित जी को फटकारा। 
गुरुवार को सीमाओं की सुरक्षा पर राज दरबार में चर्चा हुई। किंतु सेनापति उपस्थित नहीं थे। इस कारण सीमाओं की सुरक्षा की चर्चा आगे ना हो सकी राजा ने मंत्री को कड़े आदेश दिए हैं कि राजदरबार में सारे सभासद ठीक समय पर आएं यह कहकर मुरादी वाले ने ढोल बजा दिया। 
इस प्रकार हर सप्ताह नगर में जगह-जगह मुनादी में तेनालीराम की चर्चा होती थी। तेनालीराम की चर्चा के बाद मंत्री सेनापति और पुरोहित के कानों पर भी पहुंचे। वे तीनों बड़े चिंतित हुए। कहने लगे तेनालीराम ने हमारी बाजी उलट कर ही रख दी। जनता समझ रही है कि वह दरबार में सबसे प्रमुख है। वह जानबूझकर हमें बदनाम कर रहा है। 
दूसरे ही दिन जब राजदरबार भरा तो मंत्री ने कहा महाराज हमारा संविधान कहता है की राजदरबार में जो कामकाज की बाटे होती है वह समस्त बातें गोपनीय होनी चाहिए। उन बातों को जनता या प्रजा में नहीं बताना चाहिए। वह ठीक नहीं रहेगा। तभी तेनालीराम बोल पड़ा बहुत अच्छे मंत्री जी, आपको शायद उस दिन यह बात यार नहीं थी। आपको भी तभी याद आया जब आपके नाम का ढोल पीटा गया। 
हिंदी कहानिया पढनेकेलिए यहाँ Click करे 
अकबर बीरबल हिंदी कहानिया- akbar birbal story in hindi

  1. ५ बेहतरीन अकबर बीरबल हिंदी कहानिया। - akbar birbal story in hindi
  2. पति को सबक | तानसेन की शर्त - akbar birbal story in hindi
  3.  अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां | बीरबल को दंड | नन्हा साक्षीदार akbar birbal story in hindi
  4. अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां | अकबर बादशाह की बीमारी | एक दांत का सपना akbar birbal story in hindi
  5. अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां | छड़ी लगे छम छम | काझी की हुई फजीती akbar birbal story in hindi
  6. अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां | हसन न्हाई akbar birbal story in hindi
  7. अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां | एक शेर मांस akbar birbal story in hindi

तेनाली रमन की चतुराई 

No comments:

Powered by Blogger.