तेनाली रमन हिंदी कहानिया | Tenali Raman story hindi | tenali raman hindi stories | असली अपराधी | तेनालीराम की कला बुद्धि


Tenali Raman story hindi or tenaliraman hindi stories - तेनाली रमन हिंदी कहानिया हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। Tenali raman story - तेनाली रमन को तेनाली रामा के नाम से भी जाना जाता है। तेनाली रमन अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे।Tenali raman - तेनाली रमन हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार हिंदी कहानिया। यह कहानी को भी पढ़े  रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर 

१. असली अपराधी 

tenali_raman_story_hindi
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एक दिन राजा कृष्णदेवराय  अपने दरबार में दरबारियों के साथ में बैठे थे।  तेनालीराम भी वहां थे अचानक एक चरवाहा वहां आया और बोला महाराज मेरी सहायता कीजिए मेरे साथ  न्याय कीजिए। 
 राजा कृष्णदेव राय ने पूछा तुम्हारे साथ क्या हुआचरवाहा बोला महाराज मेरे पड़ोस में एक कंजूस आदमी रहता है। उसका घर बहुत पुराना हो गया है। पूनम परंतु उसकी मरम्मत नहीं करवाता कल उसके घर की एक दीवार गिर गई और मेरे बकरे उसके नीचे दबकर मर गई मुझे मेरे पड़ोसी से मेरे बकरी हर्जाना दिलवाने के लिए मेरी सहायता कीजिए। 
 राजा कृष्णदेव राय के कुछ कहने से पहले ही तेनालीराम ने अपनी जगह  से उठकर कहा महाराज मेरे विचार से दीवार टूटने के लिए केवल इसके पड़ोसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता   राजा कृष्णदेव राय ने पूछा तेनालीराम तुम्हारे विचार से दोषी कौन है? तेनालीराम बोला महाराज जी आप मुझे थोड़ा समय दे तो मैं इस बात की गहराई तक जाकर असली अपराधी को आपके सामने प्रस्तुत करता हूं।  
 राजा ने तेनालीराम के अनुरोध को मान कर उसे समय प्रदान किया। तेनालीराम ने चरवाहे के पड़ोसी को बुलाया और उसे मरी बकरी का हर्जाना देने के लिए कहा पड़ोसी बोला महोदय इसके लिए मैं दोषी नहीं हो यह दीवार तो मैंने मिस्त्री से बनवाई थी। अतः असली अपराधी तो वह मिस्त्री ही है जिसने  वह दीवार बनाई उसने इसे मजबूती से नहीं बनाया इसलिए वह गिर गई। 
तेनालीराम ने मुझको बुलाया मिस्त्री ने भी अपने आप को दोषी मानने से इंकार कर दिया। और बोला अन्नदाता मुझे व्यर्थ ही दोषी करार दिया जा रहा है जबकि मेरा तो इसमें कोई दोष नहीं। असली दोष तो उन मजदूरों का है जिन्होंने  गाड़ी में अधिक पानी मिलाकर मुझे दे दिया। इसलिए मिश्रण को खराब कर दिया जिसे ईट अच्छी तरह से नहीं  चिपक पाई और दीवार गिर गई आपको  हर्जाना भरने के लिए उन्हें बुलाना चाहिए  
राजा ने मजदूरों को बुलाने के लिए अपने सैनिकों को भेजा राजा के सामने आते ही मजदूर बोले महाराज इसके लिए हमें दोषी क्यों माना जा रहा है? वह तो पानी वाला व्यक्ति है जिसने गाड़ी  चूने में अधिक पानी मिलाया।
अबकी बार गाड़ी में पानी मिलाने वाले उस व्यक्ति को बुलाया।अपराध सुनते ही वह व्यक्ति बोला इसमें मेरा कोई दोष नहीं है महाराज वह बर्तन जिसमें पानी हुआ था।  वह बहुत बड़ा था जिस कारण उसमें आवश्यकता से अधिक पानी भर गया था इसलिए पानी मिलाकर मिश्रण में पानी की मात्रा अधिक हो गई मेरे विचार से आपको उसी व्यक्ति को पकड़ना चाहिए जिसने पानी भरने के लिए मुझे इतना बड़ा बर्तन दिया। 
तेनालीराम के पूछने पर वह बड़ा बर्तन उसे कहा और किसे मिला उसने बताया।  पानी वाला बड़ा बर्तन उसे चरवाहे ने ही दिया था।  जिसमें आवश्यकता से अधिक पानी भर गया था।  तब तेनालीराम ने चरवाहे से कहा देखो सब तुम्हारा ही दोष है।  तुम्हारी एक गलती ने तुम्हारे ही बकरी की जान ले ली। चरवाहा तो करवा से चला गया परंतु तेनालीराम की बुद्धिमत्तापूर्ण न्याय की प्रशंसा कर रहे थे।

२. तेनालीराम की कला बुद्धि

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विजयनगर के राजा अपने महल में चित्रकारी करवाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने एक चित्रकार को नियुक्त किया। सरे चित्रोंको सभीने बहोत सहराया लेकिन एक चित्र की पृष्ठभूमि में प्राकृतिक दृश्य था उसे सामने खड़े होकर तेनालीराम ने भोलेपन से पूछा? इसका दूसरा पक्ष कहा हैइसके दूसरे अंग कहा है? राजा ने हंसकर जवाब दिया। तुम इतना नहीं जानते? की उनकी कल्पना ही ऐसी होती है। तेनालीराम ने मटकते हुए करते हुए कहा तो चित्र ऐसे बनते हैं।  ठीक है मैं समझ गया।  
कुछ महीने बाद तेनालीराम ने राजा से कहा महाराज में कुछ महीनों से चित्रकला का प्रयास कर रहा हूं ।और दिन--दिन सीख रहा हूंआपकी आज्ञा हो तो मैं राजमहल की दीवारों पर कुछ चित्र बनाना चाहता हूं। राजा ने कहा वाह यह तो बहुत अच्छी बात है। ऐसा करो दिन बीते चित्रों पर रंग उड़ गए हैं तुमने मिटा कर नहीं चित्र बना लो। 
तेनालीराम ने पुरानी चित्रों पर सफेदी पोती और उनकी जगह अपने चित्र बना दिए उसने एक पाव यहाँ बना दिया, एक आंख वहां, एक उंगली कई और शरीर के विभिन्न अंगों को चित्रों से उसे दीवारों पर भर दिया।  चित्रकारी के बाद राजा को उसकी कला देखने के लिए निमंत्रित किया गया। 
महल की दीवारों पर हो संबंध अंगो के चित्र देखकर राजा बहुत निराश हुए।  राजा ने पूछा कि तुमने क्या किया? तेनालीराम तस्वीरें कहां हैतेनालीराम ने कहा महाराज चित्रकला तो ऐसी ही होती है। इसमें आपको कल्पना करनी पड़ती है।  
उसके बाद तेनालीराम ने राजा कृष्णदेव राय को एक दीवार के सामने खड़ा कर दिया। आपने मेरा सबसे अच्छा चित्र तो अभी देखा ही नहीं।  यह कहकर वह राजा को एक खाली दीवार के पास लेकर चला गया। जिस पर कुछ हरी पीली लकीरे बनी थी। राजा कृष्णदेव राय ने गुस्से से पूछा ? यह क्या है तेनालीराम? तेनालीराम ने कहा। यह घास खाती गाय का चित्र  है। राजा कृष्णदेवराय  ने पूछा तो घास कहां है? तेनालीराम ने कहा घास तो गाय खा गई।तो फिर राजा कृष्णदेवराय ने पूछा गाय कहां है? तेनालीराम ने कहा घास खाकर गाय अपने तबेले में चली गई है। 
महाराज आप खली कल्पना कीजिए। तोह हो गए चित्र पूरा।  राजा कृष्णदेव राय उसकी बात सुनकर समझ गए उस दिन के बाद का जवाब दिया है।

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