तेनाली रमन हिंदी कहानिया | Tenali Raman story hindi | tenali raman hindi stories | बाबापुर की रामलीला | बिल्ली के लिए गाय |


Tenali Raman story hindi or tenaliraman hindi stories - तेनाली रमन हिंदी कहानिया हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। Tenali raman story - तेनाली रमन को तेनाली रामा के नाम से भी जाना जाता है। तेनाली रमन अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे।Tenali raman - तेनाली रमन हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार हिंदी कहानिया। यह कहानी को भी पढ़े  रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर 


 1.बाबापुर की रामलीला 

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हर वर्ष दशहरे से पूर्व हर वर्ष दशहरे से पूर्व काशी  की नाटक मंडली विजयनगर आती थी। सामान्यतः राजा कृष्णदेव राय तथा विजय नगर की प्रजा के लिए रामलीला किया करते थे।परंतु एक बार राजा को सूचना मिली कि नाटक मंडली विजयनगर नहीं आ पाएगी इसका कारण यह था कि नाटक मंडली के कई सदस्य बीमार हो गए हैं। 
यह सूचना पाकर राजा कृष्णदेवराय बहुत दुखी हुए। क्योंकि दशहरे में अब कुछ ही दिन बाकी थे। इतने कम दिनों में दूसरी नाटक मंडली की भी व्यवस्था नहीं की जा सकती थी। दूसरी कई नाटक मंडली नहीं होने के कारण इस वर्ष रामलीला होने पर आसार नहीं दिखाई पड़ रहे हैं। जबकि दशहरे से पूर्व रामलीला होना विजयनगर की पुरानी संस्कृति थी। 
महाराज को इस तरह दुखी देखकर राज राजगुरु बोले महाराज यदि चाहे तो हम रामपुर के कलाकारों को संदेश भेज सकते हैं। राजा कृष्णदेव राय ने कहा परंतु इसमें तो कुछ सप्ताह का समय लगेगा। निराश स्वर में कहा इस पर तेनालीराम बोले महाराज मे एक अच्छी रामलीला नाटक मंडली को जानता हूं। वह यह 2 दिन में आ जाएंगे और मुझे विश्वास है कि वह रामलीला का अच्छा प्रदर्शन करेंगे। 
यह सुनकर आजा प्रसन्न हो गए और तेनालीराम को मंडली को बुलाने की जिम्मेदारी सौंप दी । साथ ही मंडली के रहने और खाने पीने की व्यवस्था का भार भी तेनालीराम के ऊपर आ गया। शीघ्र ही रामलीला के लिए सारी व्यवस्था करने की शुरू हो गई। 
रामलीला के मैदान को साफ किया गया। एक बड़ा सा मंच बनाया गया। नवरात्रि के लिए मैदान को सजाया गया। रामलीला देखने के लिए लोग बहुत उत्सुक थे क्योंकि इसके पूर्व काशी के नाटक मंडली के ना आने की सूचना से काफी दुखी थे। परंतु अब नहीं नाटक मंडली के आने की सूचना से उनका उत्साह दुगना हो गया था।  
महल के निकट एक मेला भी लगाया गया था कुछ ही दिनों में मंडली रामलीला के लिए तैयार हो गई। राजा दरबारी मंत्री को प्रजा प्रतिदिन रामलीला देखने के लिए आते थे। दशहरे के दिन की अंतिम कड़ी बहुत सराहनीय थी। मंडली में अधिकतर कलाकार बच्चे थे। उनकी कलाकारी देखकर लोगों की आंखों में आंसू आ गए। 
दशहरे के पश्चात राजा ने कुछ मंत्रियों तथा मंडली के सदस्यों को महल में भोजन के लिए बुलाया था। भोजन के पश्चात राजा ने मंडली के सदस्यों को पुरस्कार दे दिए। फिर वह तेनालीराम से बोले तुम्हें इतनी अच्छी मंडली कैसे मिली?बाबा पुर से महाराज तेनालीराम ने उत्तर दिया। 
बाबापुर यह कहा है ? मैंने इसके विषय में कहीं नहीं सुना। राजा ने आश्चर्य से पूछा बाबापुर विजय नगर के पास ही है महाराज तेनालीराम बोला। तेनालीराम की बात सुनकर मंडली के कलाकार मुस्कुरा दिए। उनसे उनके इस तरह मुस्कुराने का कारण पूछा तो रामलीला मंडली का एक छोटासा बच्चा बोला महाराज वास्तव में हम विजयनगर से ही है। तेनाली बाबा ने 3 दिन में हमें यह नाटक करना सिखाया था।  इसीलिए इसे हम बाबापुर के रामलीला कहते हैं। 
यह सुनकर आजा भी खिल खिलाकर हंस पड़े और उन्हें भी बाबापुर के रहस्य का पता चल गया था।



 2.बिल्ली के लिए गाय

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एक बार की बात है। बहुत सारे चूहे विजय नगर के लोगों को परेशान कर रहे थे । चुहोसे से छुटकारा पाने की बहुत कोशिश की गई। अंत में इस समस्या के हल के लिए राजा ने घोषणा की की चूहों को पकड़ने के लिए प्रत्येक परिवार को एक बिल्ली दी जाएगी। बिल्ली की देखरेख का बोझ लोगों पर न पड़े इसलिए प्रत्येक घर को एक गाय भी दी जाएगी जिससे उस गाय का दूध बिल्लियों को पिलाया जा सके । 
राजा कृष्णदेव राय का निर्णय तेनालीराम को पसंद नहीं आया और इसलिए तेनालीराम ने राजा कृष्णदेव राय को समझाने  के लिए एक योजना बनाई। तेनालीराम अपने बिल्ली को पीने के लिए प्रतिदिन गर्म दूध देता।  बिल्ली जैसे ही उसकी और दूध पिनेकेलिए जाती तोह उसकी जीभ बुरी तरह से जल जाती। 
इसलिए बिल्ली ने धीरे-धीरे दूध पीना बंद कर दिया। एक दिन राजा बिल्लियों का निरीक्षण करने के लिए शहर गए। राजा कृष्णदेव राय ने देख लिया तो सभी घर की बिल्लियां बहुत अच्छी है । और तेनालीराम  की बिल्ली और पतली और दुर्बल हो गई है। 
राजा कृष्णदेव राय के पूछने पर तेनालीराम बोला यह बिल्ली दूध नहीं पीती। तेनालीराम की बात की सत्यता जांचने के लिए राजा के कहने पर बिल्ली को दूध दिया गया। परंतु हमेशा की तरह अपनी जलीहुई जीभा की याद आते ही वह दूध देखकर तुरंत भाग गई। 
राजा कृष्णदेव राय समझ गए कि अवश्य ही इसमें तेनालीराम की कोई चाल है। इसने अवश्य ही कुछ ऐसा किया है जैसे ही बिल्ली को दूध देख कर भाग जाना पड़े। 
राजा कृष्णदेव राय क्रोधित होकर अपने  सेनापति से बोल पड़े  तेनालीराम को दस कोड मार दी जाए । तेनालीराम ने राजा की ओर देखा और बोला महाराज मुझे दस कोड़े  मारिए मुझे इसका कोई दुख नहीं है लेकिन मनुष्य को पीने के लिए भरपूर मात्रा में दूध उपलब्ध ही नहीं है और तभी बिल्लियों को इस प्रकार दूध पिलाना उचित है? 
राजा कृष्णदेव राय को अपनी गलती का एहसास हो गया। उन्होंने तुरंत आदेश दिया कि गायों के दूध का उपयोग बिल्लियों की अलावा मनुष्य के लिए किया जाए। 
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