तेनाली रमन हिंदी कहानिया | Tenali Raman story hindi | tenali raman hindi stories | तेनालीराम का प्रयोग | तेनालीराम का पुत्र

Tenali Raman story hindi or tenaliraman hindi stories - तेनाली रमन हिंदी कहानिया हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। Tenali raman story - तेनाली रमन को तेनाली रामा के नाम से भी जाना जाता है। तेनाली रमन अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे।Tenali raman - तेनाली रमन हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार हिंदी कहानिया। यह कहानी को भी पढ़े  रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर 


 १. तेनालीराम का प्रयोग 

Tenalirama_Hindi_Story_Hindi_Kahaniya
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राजा कृष्णदेवराय तेनालीराम की बुद्धिमानी वह चतुराई के कारणों से बहुत प्यार करते थे। परंतु राजगुरु उससे ईर्ष्या करते थे। राजगुरु के साथ कुछ चापलूस दरबारी भी थे जो उनके विचारों से सहमत थे।  एक दिन सभी ने मिलकर तेनाली को अपमानित करने के लिए एक योजना बनाई। अगले दिन के दरबार में राजा कृष्णदेव राय को बोले महाराज तेनालीराम ने पारस पत्थर बनाने की विधि सीखी है। वह एक जादुई पत्थर है। जिससे लोहा भी सोना बन सकता है। राजा कृष्णदेवराय ने कहा यदि ऐसा है तो राजा होने के नाते वह पत्थर प्रजा के भलाई के लिए मेरे पास होना चाहिए। इस विषय में मैं तेनाली से बात करूंगा। राजगुरु ने कहा परंतु महाराज आप उस उसे यह मत कहना कि मैंने आपसे इसके बारे में कहा है। राजगुरु ने राज्य से प्रार्थना करते हुए कहा। 
अगले दिन के दरबार में आने पर राजा कृष्णदेवराय ने उससे कहा तेनालीराम मैंने सुना है कि तुम्हारे पास पारस है। तुमने लोहे को सोने में बदल कर बहुत धन इकट्ठा कर लिया है। तेनालीराम बुद्धिमान तो था तो वह तुरंत समझ गया कि किसी ने राजा को उसके विरोध में झूठी कहानी सुना कर उसे फंसाने की कोशिश की है। 
 इसलिए वह राजा को प्रसन्न करते हुए बोला जी महाराज यह सत्य है मैंने ऐसी कला सीख ली है और उससे काफी सोना भी बनाया है। महाराज राजा कृष्णदेव राय ने कहा तो तुम कला का प्रदर्शन अभी से दरबार में करो। तेनालीराम ने कहा महाराज मैं अभी ऐसा नहीं कर सकता इसके लिए मुझे कुछ समय लगेगा। कल सुबह मैं आपको लोहे को सोने में बदलने की कला दिखाऊंगा।  राजगुरु और उसके साथी समझ गए कि तेनालीरामा फस गया है। लेकिन वह इस बात से उत्सुक थे कि तेनालीराम इससे छुटकारा पाने के लिए क्या करेगा?
 अगले दिन तेनालीराम गली के एक कुत्ते के साथ दरबार में आ गया। उस कुत्ते की पूंछ को तेनालीराम ने नली में डाला हुआ था। उसे इस प्रकार दरबार में आता देख हर व्यक्ति हंस रहा थे।  परंतु यह देखकर राजा कृष्णदेव राय और तेनालीराम से बोले। तेनालीराम तुमने गली के कुत्ते को राज दरबार में लाने की हिम्मत कैसे की? तेनालीराम ने कहा महाराज क्या आप जानते हैं कि कुत्ते की पूंछ को कितने वर्षों तक नली में रखें तभी वह सीधी नहीं हो सकती? वह अपनी कुटिल प्रकृति को कभी नहीं छोड़ सकते। राजा कृष्णदेव राय ने कहा हा तेनालीराम में इसके बारे में जानता हूं। तेनालीराम ने कहा महाराज मैं यहां इसी बात को तो साबित करने के लिए इस कुत्ते को लेकर आया हूं। और मैं यही साबित करना चाहता हूं । राजा कृष्णदेव राय ने कहा तेनालीराम मूर्खों की जैसी बातें मत किया करो कुत्ते की पूंछ कभी सीधी हुई क्या? जो तुम कुछ मुझसे पूछेंगे क्या मैं वही करूंगा? बल्कि तुम जानते हो कि तुम इस कुत्ते की पूछ को सीधी नहीं कर सकते हो क्योंकि यही इसकी प्रकृति है। 
तेनालीराम ने कहा ठीक यही मैं आप को दिखाना चाहता हूं महाराज और सिद्ध करना चाहता हूं कि जब तक एक कुत्ते की पूंछ अपनी प्रकृति के विरोध सीधी नहीं हो सकती तो फिर लोहा अपने प्रकृति को छोड़कर सोना कैसे बन सकता है?
 राजा कृष्णदेव राय को तुरंत अपनी गलती का एहसास हो गया। वह समझ गए उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे राजगुरु की झूठी बातों पर यकीन कर लिया और आंख बंद करके विश्वास कर लिया। राजा कृष्णदेव राय नेराजगुरु को कुछ नहीं कहा परंतु तेनाली को चतुराई के लिए पुरस्कृत किया। राजगुरु और उनके साथी दरबारियों ने शर्म से अपना सिर झुका लिया। क्योंकि उन लोगों के लिए यह अपमान बहुत दंड था इसके बाद तेनालीराम के खिलाफ कुछ भी कहने की उनकी हिम्मत नहीं हो पा रही थी। 

२. तेनालीराम का पुत्र

Tenalirama_Hindi_Story_Hindi_Kahaniya
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राजा कृष्णदेव राय के महल में एक प्रस्तुत ध्यान था। वह विभिन्न प्रकार की सुंदर सुंदर फूल लगे हुए थे। एक बार एक विदेशी ने उन्हें एक पौधा उपहार में दिया था। जिस पर गुलाब उठते थे। बगीचे के सभी पौधे में राजा को वह पौधा अत्यंत प्रिय था।  

एक दिन राजा ने देखा की पौधे पर गुलाब की संख्या कम हो रही है उन्हें लगा कि हो ना हो अवश्य ही कोई गुलाबों की चोरी कर रहा है। उन्होंने पहले तारों को सतर्क रहने के लिए कहा था।  गुलाब  के चोर को पकड़ने का आदेश दे दिया । अगले दिन  पहरेदार ने चोर को रंगे हाथ पकड़ ही लिया।  वह और कोई नहीं तेनालीराम का पुत्र था।  

उस समय के नियम के अनुसार जिसे भी चोर को जब पकड़ा जाता था तो उसे विजयनगर के चरण सड़कों पर घुमाया जाता था अन्य लोगों की तरह तेनालीराम के पुत्र को भी ऐसा ही करने का आदेश मिला  क्योंकि वह गुलाब चुराते हुए पकड़ा गया था । 

तेनालीराम का पुत्र सिपाहियों के साथ घर के पास से गुजर रहा था। तो उसके पत्नी तेनालीराम से बोली अपने पुत्र की रक्षा के लिए आप कुछ क्यों नहीं कर रहे हैं? लेकिन तब तेनालीराम ने अपने पुत्र को सुनाते हुए जोर से कहा मैं क्या कर सकता हूं हां यदि वह आपने तीखी जुबान का प्रयोग करें तो हो सकता है। कि वह स्वयं को बचा सके। तेनालीराम का  पुत्र ने जब यह बात सुनी तो वह यह बात समझ नहीं पाया कि पिताजी इस बात से क्या कहना चाह रहे हैं। पिताजी ने जरूर उसे सुनाने के लिए यह बात इतनी जोर से बोली हुई है।  

लेकिन तीखी जुबान का प्रयोग करने से आखिर क्या मतलब हो सकता है? यदि वह इसका अर्थ समझ जाए तो  वह बच सकता है। कुछ समय पश्चात तेनालीराम के पुत्र को बात समझ में आ गई और वह समझ गया कि पिताजी के कहने का अर्थ क्या था? अपनी तीखी जुबान का प्रयोग करने का अर्थ यह था कि वह मीठे गुलाबों को किसी को देखने से पहले खा ले।  अब क्या था वह धीरे-धीरे गुलाब के फूलों को खाने लगा इस प्रकार महल में पहुंचने से पहले ही वह सारे गुलाब खा गया। और सिपाहियों ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया। 

दरबार में पहुंचकर सिपाहियों ने तेनालीराम के पुत्रों को राजा के सामने खड़ा कर दिया और कहा महाराज इस लड़के को हमने गुलाब चुराते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। राजा कृष्णदेव राय ने कहा अरे इतना छोटा बालक और चोर राजा कृष्णदेव राय ने चोरी से पूछा इस पर तेनालीराम का पुत्र बोला महाराज में तो केवल बगीचे में जा रहा था परंतु आप को प्रसन्न करने के लिए इन्होंने मुझे पकड़ लिया। मुझे लगता है कि वास्तव में यह स्वयं ही गुलाब चुराते होंगे मैंने कोई गुलाब नहीं चुराया क्या आपको मेरे पास कोई गुलाब दिखाई दे रहा है? यदि में रंगे हाथों पकड़ा गया हो तो मेरे हाथों में गुलाब होनी चाहिए थे।  

गुलाबों को ना पाकर पहरेदार अचंभित हो गए। राजा उन पर को क्रोधित होकर बोले तुम एक सीधे साधे  बालक को चोर कैसे कह सकते हो और इसे चोर कहने के लिए तुम्हारे पास कोई सबूत भी नहीं है । चले जाओ और भविष्य में बिना सबूत  के किसी को भी अपराधी होने का आरोप मत लगाना इस प्रकार तेनालीराम का पुत्र तेनालीराम के बुद्धिमता से स्वतंत्र हो गया। 
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