akbar birbal story in hindi | akbar birbal hindi story - अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां | एक शेर मांस



akbar birbal story in hindi or akbar birbal hindi story - अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। akbar birbal story - अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां बहोत मशहूर है।  बीरबल अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे। बीरबल हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे। दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार अकबर बीरबल की हिंदी कहानिया akbar birbal story in hindi। यह हिंदी कहानी को भी पढ़े। 

akbar birbal story in hindi
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आगरा शहर में दो महाजन हुआ करते थे। उनमें से एक का नाम  नेकीराम था। वह एक सीधा-साधा शरीफ आदमी था जो कभी भी अपने ग्राहकों से बेईमानी नहीं करता था। ना उनसे ज्यादा ब्याज लेता था। और कभी भी किसी की मदद करने से पीछे नहीं हटता था। 
दूसरे का नाम धनीराम था वह एक  लालची आदमी था वह हर किसी से बेईमानी करने की ही सोचता था। साथ ही ब्याज भी बहुत ज्यादा मांगता था धनीराम के ग्राहक अपनी सारी जिंदगी उसका छोटा सा कर्जा चुकाने में ही गुजार देते  थे। 
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एक दिन एक कमल नाम का आदमी नेकीराम के पास चला गया नेकीराम ने उसका आदर पूर्वक स्वागत किया नेकीराम ने कमल से पूछा कहो यहां  कैसे आना हुआ? कमल ने कहा मित्र मुझे पैसों की सख्त जरूरत है मुझे अपने व्यापार में लगाने के लिए 500 सोने की  मोहरे चाहिए और यह पैसे  6 महीने में लौटा दूंगा  
नेकीराम ने कहा मित्र में काश तुम्हारी मदद कर सकता लेकिन क्या तुम शाम तक रुक सकते हो? कुछ लोग शाम को मेरे पैसे वापस लौट आने वाले हैं   कमल ने कहा ठीक है लेकिन जैसे मैंने कहा कि इन पैसों की मुझे आज ही जरूरत है श्याम होने के बाद जब  कमल वापिस निगम के पास गया तो  नेकीराम ने कहा  मित्र क्या 300 सोने की मोहरों से तुम्हारा काम  बन जाएगा क्योंकि मैं सिर्फ इतने का ही इंतजाम कर पाया बाकी मैं तो मैं अगले हफ्ते में दे दूंगा
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कमल ने कहा नेकीराम मुझे आज ही जयपुर के लिए रवाना होना है और अगर पैसे ना मिले तो मैं बर्बाद हो जाऊंगा मेरा सब कुछ दाव पर लगा है
उस पर नेकीराम ने बहुत सोचा और कहा ठीक है मैं कुछ देर बाद बताता हूं। नेकीराम ने कहा धनीराम मेरे बगल में ही है मैं बहुत सालों से उसे जानता हूं वह भी एक महाजन है तुम्हारे लिए उससे पैसे उधार लेता हूं
 उसके बाद नेकीराम धनीराम के पास चला गया उसने कहा मेरा मित्र कमल मैं उसे बचपन से जानता हूं उसे कुछ पैसों की सख्त जरूरत है और मुझे 200 सोने की  मोहरों की जरूरत है यह रकम में 6 महीने में वापस लौटा दूंगा धनीराम ने कहा ठीक है   नेकीराम क्योंकि मैं तुम्हें जानता हूं मैं तुम्हें भी उतार दूंगा लेकिन मेरे दो शर्ते हैं  

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पहेली इस रकम पर 50 सोने की  मोहरों का ब्याज होगा और दूसरी यह अगर तुम 6 महीने में मेरी यह पूरी रकम नहीं लौटा पाते तो तुम्हें मुझे अपने जिस्म का एक शेर मांस देना होगा
नेकीराम ने  सोच कर कहा  ठीक है मेरे मित्र को इसकी बहुत ज्यादा जरूरत है तो मैं तुम्हारी हर शर्त मंजूर करता हूं क्योंकि मुझे यकीन है कि मेरा मित्र मुझे कभी धोखा नहीं देगा और मेरे पैसे जोड़ लौटा देगा और मैं तुम्हारी शर्त से बच पाऊंगा
शर्त मानने से धनीराम ने निगम को 200 सोने की मोहरे दे दी और कहा याद रखना नेकीराम अगर तुमने 6 महीने में मेरे पैसे नहीं लौटाए तो तुम ही मुझे अपने जिस्म का एक शेर  मास देना होगा
उसके बाद नेकी राम ने वापस आकर कमल को पैसे दे दिए और कहा कमल अब मेरी जिंदगी तुम्हारे हाथों में है मित्र कैसे भी करके यह रकम 6 महीने में लौटा देना कमल ने कहा हे भगवान बड़ा जालिम आदमी है घबराओ नहीं नेकीराम मैं पूरी रकम लेकर लूंगा और उस जालिम आदमी का कर्ज उतार दूंगा तुम एक सच्चे मित्र हो तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद! और मैं तुम्हारा यह एहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगा अब मैं चलता हूं मित्र   नेकीराम सेआज्ञा लेकर कमल वहां से चला गया
6 महीने बाद
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नेकीराम कमल की राह तकता रहता  था। 6 महीने पूरे होने के बाद कमल वापस नहीं आया लेकिन धनीराम नेकीराम के पास गया और उसने कहा  नेकीराम तुम्हारे 6 महीने पूरे हो गए हैं और कहां है मेरे पैसेनेकीराम ने कहा धनीराम मैं खुद कमल का इंतजार कर रहा हूं लेकिन वह अभी तक लौटा नहीं लेकिन मुझे यकीन है कि वह मुझे निराश नहीं करेगा और शाम से पहले जरूर लौटेगा और मैं तुम्हारे पैसे सूरज ढलने से पहले ही लौटा दूंगा   धनीराम ने कहा ठीक है तुम्हारे पास शाम तक का समय है अगर तब तक मुझे मेरे पैसे नहीं मिले तो तुम्हें याद है ना तुम्हें मुझे अपने जिस्म का एक शेर मार देना होगा
नेकीराम ने कहा धनीराम तुम्हें तुम्हारे पैसे मिल जाएंगे मुझे अपने मित्र पर पूरा भरोसा है और वह मुझे निराश नहीं करेगा 
यह विचार में नेकीराम इधर उधर पुरे घर में हाथों पर हाथ रखे घूमता रहा और कमल के  राह देखता रहा लेकिन शाम होने के बाद भी कमल नहीं आया लेकिन धनीराम गया और उसने कहा नेकी राम कहां हो तुम?   नेकीराम ने कहा  मैं आप भी तुम्हें ही मिलने रहा था कमल अब तक लौटा नहीं जरूर कुछ समस्या हो गई होगी वह एक-दो दिन में जरूर लौटेगा नहीं तो खुद में जयपुर जाकर उसका पता लगा होगा मुझे सिर्फ कुछ दिनों की मोहलत और दे दो  

धनीराम ने कहा बिल्कुल नहीं मैं अब तो मैं और मोहलत नहीं दे सकता या तो तुम मुझे मेरे पैसे वापस लौटा दो या फिर  शर्त के मुताबिक अपने जिस्म का एक शेर मास मुझे दे दो  
 नेकीराम ने कहा धनीराम मुझ पर रहम करो अगर तुम मेरे जिस्म का एक शेर मास काटोगे तो मैं मर जाऊंगा मैं तुम्हारे पैसे लौटा दूंगा मुझे सिर्फ थोड़े दिन की मोहलत दे दो  धनीराम ने कहा अब कोई फायदा नहीं या तो शर्त के मुताबिक मुझे मेरे सारे पैसे लौटा दो या फिर मुझे अपने जिस्म का एक शेर मार दे दो इसी  हडबड में वहां पर बहुत भीड़ इकट्ठा हो गई थी
उसी समय वहां से एक सिपाही जा रहा था उसने सारी भीड़ देखकर पूछा जहां पर क्या हो रहा है? धनीराम ने कहा हुजूर  इस आदमी ने मुझसे उधार लिया था और अभी यह ना ही मेरे पैसे लौटा रहा है और ना ही शर्त के मुताबिक पैसे ना लौटाने पर अपने जिस्म का एक शेर  मास मुझे दे रहा है
 सिपाही ने  नेकीराम से पूछा क्या यह सच बोल रहा हैनेकीराम ने कहा जी हजूर यह सच है मैंने उधार लिया था लेकिन मेरा मित्र जयपुर से अब तक लोटा नहीं और मुझे यकीन है वह जरूर आएगा और जल्द ही मुझे बस थोड़ी मोहलत और चाहिए सिपाही ने धनीराम से कहा तुम उसे थोड़ी सी मोहलत और क्यों नहीं देते और उसे भी अपने ब्याज में जोड़ देना धनीराम ने कहा नहीं हुजूर मैं और नहीं रुक सकता याद तो वह मुझे अपने पैसे लौटाए या फिर मुझे अपने जिस्म का एक शेर मार दे दे
वहां पर इकट्ठा हुए लोगों ने कहा नहीं नहीं यह आदमी बहुत जालिम है नेकीराम तो एक भला आदमी है और उसे थोड़ा समाचार मिलना ही चाहिए लेकिन धनीराम किसके बात सुनने के लिए तैयार नहीं था इस पर सिपाही ने कहा तुम दोनों ही मेरे साथ दरबार चलो कल सुबह शहंशाह अकबर खुद इसका फैसला करेंगे उसके बाद वह दोनों सिपाही के साथ दरबार चले गए
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दूसरे दिन सुबह जब दरबार भरा तभी सिपाही ने सारी बात बादशाह अकबर को सुना दी और कहा इसीलिए मैं इन दोनों को यहां पर ले कर आया हूं हजूर
 अकबर ने कहा बीरबल अब तुम ही यह मामला सुलझा दो और उसी वक्त कमल राज दरबार में गया   उसने कहा हजूर मेरा नाम कमल है मैं  नेकीराम का मित्र हूं जिसकी वजह से यह समस्या खड़ी हुई है मुझे शहर से लौटते हुए जरा सी देर हो गई लेकिन मैं धनीराम के पूरे पैसे लेकर आया हूं बादशाह अकबर ने कहा धनीराम तुम्हें तुम्हारे पैसे वापस मिल गए तो मेरे ख्याल से यह मसला भी सुलझ गया है
धनीराम ने कहा नहीं  हजूर अब मुझे पैसे नहीं चाहिए और शर्त के मुताबिक वक्त पर पैसे ना लौट आने पर मुझे आप उसके जिस्म के मांस का एक शेर चाहिए   बादशाह अकबर ने कहा तुम इतने झूठ क्यों बन रहे होपैसे लौटाने में एक ही दिन की देरी हो गई है तभी धनीराम ने कहा हुजूर यह बात है वादा करके उससे ना निभाने की क्योंकि मैं आपके सामने खड़ा हूं यह अपना व्यापार बंद करके यह शहर छोड़ दे तो मैं उसका एक शेर मांस नहीं लूंगा
नेकीराम ने कहा हुजूर यह शहर मेरा घर है मैं यह शहर छोड़ कर कहा जाऊंगा यह मुझसे कैसे होगातभी कमल ने कहा मित्र क्योंकि यह सब मेरी वजह से हुआ है तू मेरे साथ जयपुर चलो और मेरे घर में रहना।
 बादशाह अकबर ने कहा  ठहरो मुझे समझ में नहीं रहा धनीराम तुम  धीट क्यों हो? अपने पैसे लो और यह मसला अभी इसी वक्त खत्म करो।
धनीराम ने कहा हुजूर आप तो शहंशाह है आपका हुकुम तो मानना ही होगा लेकिन इसका मतलब यह होगा व्यापार में दिए किसी भी वादे की कोई कीमत नहीं है लेकिन फिर भी आप यही चाहते हैं तो......

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 तभी बीरबल ने कहा हुजूर मैं कुछ कहना चाहता हूं   धनीराम तुमने कि राम के जिस्म का एक शेर  ले सकते हो अगर यही तुम्हारी जिद है तो बीरबल ने सिपाही को अपनी तलवार देने के लिए कहा जैसे ही धनीराम में तलवार बाहर निकालो और वह निगम के पास चला गया  तभी बीरबल ने कहा रुको याद रखना वादे के मुताबिक तुम्हें सिर्फ एक शेर मांस की ही मांग की है लेकिन अगर तुम एक बूंद खून बहाओगे  तो तुम्हें उसके बदले में अपना खून देना होगा
 धनीराम ने कहा लेकिन यह कैसे हो सकता है? तबीयत बादशाह अकबर हंसे और बीरबल के साला खींचे सारा दरबार खुश हो गया बीरबल ने कहा यह कैसे करना है यह तुम्हारी समस्या है और शर्त के मुताबिक तुम्हें सिर्फ एक शेर ही मास काटना है लेकिन को नहीं बाहर सकते अगर तुम से बन सके तो ही आगे बढ़ना बीरबल के ऐसा कहते  ही धनीराम पीछे हट गया   बीरबल ने अकबर बादशाह यह आदमी अपने वादे के मुताबिक अपनी शर्त से पीछे हट रहा है
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अकबर बादशाह ने कहा तुम एक जालिम इंसान हो और तुम्हारी इरादे भी कुछ ठीक नहीं है तुम बस नेकीराम को अपने रास्ते से हटाना चाहते हो। क्योंकि वह तुम्हारे ही व्यापार में है धनीराम ने बादशाह अकबर  और बीरबल से माफी मांगी अकबर में कहा तुम्हें माफी नहीं मिल सकती क्योंकि मुझे यह भी पता चला है कि तुम काफी लोगों के साथ बहुत बेमानी और जाति करते हो और तुम्हें 1 साल कैद की सजा सुनाई जाती है विराम को जो रकम तुम्हें उतार दी है वह रकम हम उसे अपनी परेशानी के बदले में दे देते हैं  
 नेकीराम ने अकबर और बीरबल का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया
 बीरबल ने फिर अपनी चतुराई से एक जरूरतमंद इंसान को सही न्याय दिया है


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