akbar birbal story in hindi | akbar birbal hindi story - अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां | छड़ी लगे छम छम | काझी की हुई फजीती

akbar birbal story in hindi or akbar birbal hindi story - अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। akbar birbal story - अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां बहोत मशहूर है।  बीरबल अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे। बीरबल हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार अकबर बीरबल की हिंदी कहानिया akbar birbal story in hindi। यह हिंदी कहानी को भी पढ़े। 

१. छड़ी लगे छम छम

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दिल्ली शहर में एक अत्यंत गुस्से वाली स्त्री रहती थी बार-बार अपने पति पर गुस्सा करते हुए अपने पति को चप्पल से पीटते रहती थी छोटे-छोटे कारणों से वह अक्सर गुस्सा होती थी जिसे बरतनी हाथियों रखें वहां क्यों रखे यहां पर झाड़ू क्यों नहीं लगाया ऐसे छोटे-छोटे कारणों से वह अक्सर पति को पीटा करती थी पति के हजारो दफा माफी मांगने पर भी वह एक नहीं सुनती थी

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 दिन भर तो बहुत खूब खाती ही रहती थी और अपने पति से काम करवाती रहती थी और अपने पति को ताने देते हुए  कहती देखो मैं हूं इसलिए घर बहुत अच्छी तरह से चल रहा है अगर तुम्हारे भरोसे छोड़ देती तो जाने इसका क्या हो जाता तो घर ही नहीं रहता वह तो अच्छा है कि यह चप्पल है मेरे साथ

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 इस तरह यह स्त्री अपने पति को अपने मायके के देवी के प्रसाद के नाम से हमेशा चप्पल से मारती रहती थी और पति बेचारा चुपचाप  सहता रहता था ऐसे ही एक दिन  स्त्री ने अपने पति को  गुस्से में आकर बहुत ही  पीटा और पति ने भी हमेशा की तरह वह सहन कर लिया

यह सब देखते हुए पड़ोस के महिपति को उस स्त्री के पति दौलत पर बहुत तरस गया  एक बार दौलत को अकेले देखकर महिपति  उसके घर में चला गया।

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 महिपति  ने दौलत से  कहा दौलत तुम इस तरह क्यों मारते होऔर इस सब का विरोध क्यों नहीं करते?   दौलत बोला  उसका मारना हमारे घर के  भलाई के लिए ही है। वह मुझे मारती है लेकिन गुस्से से नहीं प्रेम से अरे उसके पास जो चप्पल है वह मायके की देवी ने उसे प्रसन्न होकर दी है उस चप्पल के मार खाए बगैर हमारा घर ठीक ठाक रह ही नहीं सकता ऐसा उस देवी ने उसे बताया है 
 दौलत की सारी बातें सुनकर   महिपति बोला  घर के सारे काम तो तुम ही करते हो और ऊपर से मार भी तुम ही खाते हो यह बात समझ में नहीं आती तुम इसका कोई मार्ग क्यों नहीं निकालते महिपति ने दौलत को बीरबल से मिलने की सलाह दे दी

लेकिन दौलत बोला यह तो हमारा घर का मामला है इसमें बीरबल क्या कर सकता हैमहिपति ने फिर समझाया देखो दौलत तुम एक आदमी हो  अगर किसी औरत ने तुम्हारे साथ आदमी जैसा बर्ताव नहीं किया यह अयोग्य है  अगर तुम बीरबल से मिलोगे तो वह तुम्हें सही रास्ता दिखाएंगे

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दौलत ने बीरबल से मिलकर अपने घर के हालात बताएं यह सुनकर बीरबल ने दौलत से कहा...  दौलत कोई भी देवी किसी की भी ऊपर अन्याय हो ऐसा प्रसाद कभी नहीं देते तो तुम्हारे पत्नी के मायके की ओर से मिला हुआ चप्पल का प्रसाद सच है या झूठ यह हमें देखना ही होगा बीरबल ने कहा अब मेरी बात ध्यान से सुनो और कल बिल्कुल वैसा ही करना
 अगले दिन जैसे ही सुबह-सुबह दौलत की पत्नी ने दौलत को पुकारा दौलत ने अपनी बीवी को अपने नजदीक बुलाते हुए कहा जल्दी से देखो इसे यह क्या हैदेखो यह लोहे की सलाख यह  सलाखें कोई सादा सीधा नहीं है  कल रात  बजरंगबली मेरे सपने में आए थे और उन्होंने प्रसन्न होकर यह लोहे की सलाख मुझे दे दी है  

दौलत की पत्नी ने पूछा लेकिन इस सलाख का करोगे क्यादौलत ने कहा अरे जैसे तुम्हारे देवी ने वह चप्पल दी है ना वैसे ही यह  सलाख  है जैसे तुम्हें गुस्सा आने पर मैं इस चप्पल का मार खाता हूं और उसके कारण अपना ही एक घर ठीक-ठाक रहता है वैसे ही मुझे गुस्सा आया तो यह सलाख  का मार तुम्हें खाना होगा और इसके कारण अपने घर में बहुत समृद्धि आएगी अपने बादशाहा जितना धन  हमें मिलेगा और तुम्हारा थाट बिल्कुल महारानी जैसा होगा देखना।
 यह सुनते ही दौलत की पत्नी डर गई और उसने पति से पूछा लेकिन यह सब तुम्हें किसने बताया? उस पर दौलत ने कहा किसने बताया का क्या मतलब है साक्षात बजरंगबली जी ने बताया है चलो अब से ही इसकी शुरुआत करता हूं और ऐसा कहते हैं दौलत अपने पत्नी को उस लोहे की सलाख से पीटने लगा

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जैसी ही सलाखें मार पत्नी पर पड़ी वह बोली मत मारो मुझे मत मारो मैं कभी भी तुम पर गुस्सा नहीं करूंगी और वह देवी का दिया हुआ चप्पल का प्रसाद भी झूठा है मेरी मां ने बताया था अपने पति को काबू में रखने के लिए ऐसा करने को कहा था लेकिन उस पर दौलत ने कहा लेकिन मेरी यह सलाख सच्ची है इसे कहते ही पत्नी की अकल ठिकाने गई और उसने कहा आज  सारा काम मैं ही करूंगी पूर्ण ब्रह्म और आप आराम से  बैठिए दौलत ने  मन ही मन में बीरबल के आभार  मंडी और उनको धन्यवाद  कहा



२. काझी की हुई फजीती 


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एक दिन अकबर बादशाह ने बीरबल के किसी काम पर खुश होकर कहा वाह बीरबल तुम्हारी जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है तुम्हारी हाजिर जवाब का जवाब नहीं है तुम्हारा इंसाफ इन बातों से हम बहुत खुश हैं बीरबल ने कहा यह आपका बड़प्पन है जहांपना
 अकबर बादशाह ने कहा ऐसा नहीं है बीरबल तुम वाकई सबसे बढ़िया हो इसलिए मैं अपनी मर्जी से तुम्हें  200 सोने की मोहरे का इनाम दे रहा हूं इसका तुम स्वीकार करो

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बीरबल को इनाम मिलने के कारण उसकी इर्षा करने वालों के मन में खलबली मच गई बीरबल को मिले इनाम को देखकर दरबारी के बाकी मंत्री जलने लगे जलने वालों में बादशाहो का साला शेरखान और उसके साथी  सरदारों के साथ एक काझी भी था बीरबल को फंसा कर उसे चुप कराने के इरादे से काझी ने कहा जहांपना आपके यह वजीर बहुत चतुर है, जहां देखो वहां उन्हीं की तारीफ हो रही है
 लेकिन जहांपना मैं बीरबल को एक बहुत आसान सवाल पूछने वाला हूं अगर इस सवाल का जवाब वह दे पाए तभी मैं समझूंगा कि बीरबल बहुत चतुर है बादशाह ने कहा पूछो जो तुम्हें पूछना है पूछो।

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 काझी ने कहा जहांपना बीरबल जी ने अपनी पत्नी का हाथ दिन में कितनी बार देखते होगे तो अपनी पत्नी के हाथ में असल में कितनी चूड़ियां है इसका बहुत सही जवाब दे दे
 बीरबल के खिलाफ काझी के  मनोभाव का रूपांतर कहीं विवाद में ना हो जाए  इस इरादे से अकबर ने कहा वाह का जी बहुत ही कमाल का सवाल है अब तक मुझे भी मालूम नहीं है मेरी बेगम कितनी चूड़ियां पहनती है इस पर सारे दरबार में हंसी छा गई
 बीरबल ने कहा जहांपनाह अपने काजी साहब गणित के विषय में अत्यंत होशियार है यह बात तो सब जानते हैं और उन्हें हमेशा अपनी दाढ़ी पर हाथ घुमाने की आदत है इसीलिए उन्हें अपने दाढ़ी में कुल मिलाकर कितने बाल है उस बात का तो जरूर पता होना चाहिए
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 काजी ने कहा मेरा सवाल तो याद है ना बीरबल जीबीरबल ने कहा उसी का तो जवाब दे रहा हूं आपकी दाढ़ी में कुल मिलाकर जितने बाल है उसके 1000 विभाग जितनी संख्या की चूड़ियां मेरे पत्नी के दोनों हाथों में है
 बीरबल  का  ऐसा जवाब सुनकर बादशाह और सारे दरबारी हंसते-हंसते उल्टे हो गए और कार्य की हो गई पाजी

   काजी द्वारा पूछे गए  गजब के सवाल जैसा सवाल पूछने की अकबर की भी इच्छा हो गई। अगर बीरबल ने भी उसका जवाब दिया तो मजा जाएगा और नहीं दिया तो बीरबल पहली बार निरुत्तर हो जाएगा गाजर की पुंगी  बजी तो बजी नहीं तो तोड़कर खाली। 

ऐसा सोचकर अकबर बादशाह ने कहा बीरबल मेरे सारे शरीर पर बाल है लेकिन सिर्फ इस हाथ की हथेली पर ही बाल क्यों नहीं हैअब खुद बादशाह भी मजाक करने के लिए तुले हुए हैं यह बात समझ कर बीरबल को देर ना लगी। 

बीरबल ने कहा कैसी बात कर रहे हैं हजूर आप तो बहुत ही चालाक और उदार और जानकार है।आपके हाथों से हमेशा किसी ना किसी गुणवान को इनाम दिया जाता है सत्कार में मोहरे बाटी जाती है इन मोहरों से आपके हथेली पर उगने वाले निरंतर घर्षण के कारण आपके हथेली के बाल गिर जाते हैं ऐसा होने के कारण आपकी हथेली पर बाल नहीं है
 बादशाह ने कहा चलो मान लो कि मेरी बात ठीक है पर तुम कहा किसी को दान देते होफिर तुम्हारी हथेली पर बाल क्यों नहीं हैबीरबल ने कहा आपकी बात बिल्कुल सही है हजूर जैसे पहले मैंने बताया आप बहुत जानकार और उदार हैं जहांपना बार-बार खुश होकर आप मुझे भर भर कर स्वर्ण मुद्रा देते हैं आपके हथेली के बाल इनाम दे देकर गए हैं उसी तरह मेरे हथेली के  बाल इनाम ले लेकर गए हैं बादशाह ने हंसते हुए कहा तुम्हारी यह बात भी मंजूर है  
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बीरबल लेकिन दरबार में जो सारे लोग हैं उनकी हथेलियों में भी  बाल क्यों नहीं हैबीरबल ने कहा माफ कीजिए हजूर पर मुझे साफ-साफ बोलना पड़ रहा है जहांपना हर बार आप मुझसे खुश होकर मुझे ही कुछ ना कुछ इनाम में दे देते हैं लेकिन यह बात दरबार में किसी को भी पसंद नहीं है जब भी आप मुझे नाम देते हैं तब यह लोग जलन के मारे अपने हाथ एक दूसरे पर घिसने लगते हैं और इसी कारण इनके हथेलियों के बाल गिर गए हैं  

बीरबल के इस जवाब से  बादशाह बेहद खुश हो गए और उसे और 50 स्वर्ण मुद्राएं भेंट दे दी और फिर एक बार दरबार के अन्य लोग जलन के मारे हाथ गिरते रहे

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तेनाली रमन की चतुराई 

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