तेनाली रमन हिंदी कहानिया | Tenali Raman story hindi | tenali raman hindi stories | तेनाली रमन और उसका बिघडेल घोडा | तेनाली रमन और बादशाह बाबर की कहानी

Tenali Raman story hindi or tenaliraman hindi stories - तेनाली रमन हिंदी कहानिया हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। Tenali raman story - तेनाली रमन को तेनाली रामा के नाम से भी जाना जाता है। तेनाली रमन अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे।Tenali raman - तेनाली रमन हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार हिंदी कहानिया। यह कहानी को भी पढ़े  रामलिंगम से तेनाली रमन तक का सफर 



१. तेनाली रमन और उसका बिघडेल घोडा

Tenali Raman story hindi
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  एक बार एक  अरब का व्यापारी राजा कृष्णदेव राय के सभा में गया उसके पास कुछ ताकतवर और उच्च नस्ल के बहुत अच्छे घोड़े थे उसने राजा से कहा मैं आपको यकीन दिलाता हूं  इनसे बेहतर घोड़े आपको और कहीं नहीं मिलेंगे  
राजा ने बहुत सोचा और उससे कहा चलो हम देखते हैं यह दे हमें पसंद आएंगे तो हम सारे घोड़े खरीद लेंगे   अगले दिन  कृष्णदेव राय राजा ने घोड़ों का निरीक्षण किया और व्यापारी से सारे घोड़े खरीद लिए राजा ने सोचा कि इतने सारे घोड़ों को सिखाना बहुत कठिन काम होगा अर्थात उन्होंने एक उपाय सोचा  
Tenali Raman story hindi
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कृष्णदेव राय राजा ने सभा के हर एक के परिवार को एक घोड़ा दे दिया और घोड़े के पालन पोषण के लिए प्रतिमाह 300 सिक्के राजा ने सबको दे दी और उन्होंने सबसे कहा कि 3 माह के पश्चात में सारे घोड़ों का निरीक्षण कर लूंगा
 प्रत्येक परिवार को एक घोड़ा और 300 सोने के सिक्के मिले तेनालीराम उनको भी एक घोड़ा मिला तेनाली रमन घोड़े को अपने घर ले गया और पिछवाड़े में उसने एक छोटी सी घुड़साल बनाई  उसने घोड़े को वहां बंद कर दिया  
प्रतिदिन तेनाली रमन अपने घोड़े को थोड़ा सा चारा देता था जबकि अन्य लोगों ने अपने-अपने घोड़ों की बहुत अच्छी तरह से देखभाल की कुछ नहीं तो राजा को प्रसन्न करने के लिए उन सोने के सिक्कों के अतिरिक्त अपने पास से भी धन लगा दिया घोड़े तो बलवान हो गए परंतु लोग निर्बल हो गए  
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कुछ समय व्यतीत हुआ और 3 मार्च के बाद राजा कृष्णदेव राय ने उन सभी से कहा कि मैं सारे घोड़े देख लेना चाहता हूं अगले दिन तेनाली रमन के अलावा सभी लोग अपने घोड़े के साथ गए राजा ने तेनालीराम उनसे बोला  रमन तुम अकेले खड़े हो तुम्हारा घोड़ा कहां हैतेनाली रमन बोला महाराज वह एक  भयानक पशु है मैं उसके सामने नहीं जा सकता  
राजगुरु ऐसे ही किसी अवसर की प्रतीक्षा में थे वह तुरंत बोले महाराज तेनाली रमन झूठ बोल रहा है घोड़ा इतना बिगड़ैल भला कैसे हो सकता हैराजा भी सोच में पड़ गया तो तेनाली रमन ने कहा कि अगर आपको विश्वास नहीं होता तो राजगुरु को मेरे साथ भेजकर विश्वास कर ले राजा की आज्ञा के अनुसार राजगुरु और तेनालीराम घोड़े को लाने के लिए तेनाली रमन के घर चले गए रमन राजगुरु को लेकर घुड़साल में चला गया राजगुरु ने कहा चलो मुझे घोड़ा दिखाओ  
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तेनाली रमन ने गुडसाल के लिए एक छोटी सी खिड़की रखी थी  वह बोला इस तरफ से गुरुजी इस खिड़की में से देखो परंतु ध्यान रहे कि बाद में मुझे  दोष मत देना जैसे राजगुरु ने अपना सिर खिड़की के अंदर किया तो भूखे घोड़े ने अपना चारा समझकर राजगुरु की दाढ़ी पकड़ ली राजगुरु दर से चिल्लाने लगा   तेनाली रमन बोला मुझे उसके करीब आने से भी डर लगता है राजगुरु की चिल्लाने की आवाज से लोग यह जानने के लिए  इकट्ठा हो गए क्या खीर चल क्या रहा है सारे लोगों ने दीवार तोड़ने का फैसला किया। 
Tenali Raman story hindi
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सारे लोगों ने दीवार तोड़ने का फैसला कर लिया और जब दीवार तोड़ी गई तब घोड़ा बाहर गया परंतु उसने राजगुरु की दाढ़ी नहीं छोड़ी तब उनमें से एक ने बोला कि राजगुरु की दाढ़ी काटकर उनको बचाते हैं। फिर सारे लोगों ने मिलकर राजगुरु को पकड़कर उनकी दाढ़ी  काट दी  गई तभी राजगुरु छूट पाए राजगुरु ने फैसला किया कि घोड़े को महाराज के पास ले चलो घोड़े को घसीट कर राजा के पास ले जाया गया  
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जब राजा कृष्णदेव राय ने  घोड़े को देखा  तो राजा कृष्णदेव राय बोल पड़े  यह क्या रमन  घोड़ा दुर्बल क्यों दिख रहा है? तुमने सारे  सोने के सिक्कों का क्या  कियातेनाली रमन बड़ा  महाराज घोड़े को चारा अत्यल्प मिलता था इसके अलावा यह अत्यंत बिगड़ैल भी था 
तेनाली रमन बोला कि मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं राजा का कर्तव्य है कि प्रजा की रक्षा करना उनकी देखभाल करना लेकिन आपने उन पर घोड़ों को संभालने की जिम्मेदारी दे दी इस वजह से प्रजा हो गई दुर्बल और घोड़े हो गए बलवान
तेनाली रमन ने अत्यंत चतुराई से राजा कृष्णदेव राय की आंखें खोल दी और उनको उनकी  भूल बता दी राजा ने तुरंत एक सोने की सिक्कों की थैली तेनाली रमन को भेंट कर दी

 






२. तेनाली
रमन और बादशाह बाबर की कहानी 


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तेनाली रमन का नाम सारे देश में फैल गया था राजा कृष्णदेव राय के समय में  दिल्ली में   बाबर सम्राट का  राज था    और उनके दरबार में भी तेनाली रमन की बहुत चर्चा थी  

एक बार मुगल सभा में राजा ने विकटकवि को यानी तेनाली रमन को मिलने की इच्छा जताई। राजा ने एक  दूत को बुलाया  और उसे खत देकर सम्राट ने कहा यह खत राजा कृष्णदेव राय जी को दे देना वह खत लिखकर दूध विजयनगर पहुंचा  

राजा कृष्णदेव राय ने वह निमंत्रण पत्र स्वीकार किया  और राजा ने तेनाली रमन से कहा रमन तुमने विजयनगर का सम्मान बढ़ाया है, बादशाह ने खुद तुम्हें दिल्ली बुलाया है बादशाह बाबर से मिलने की तैयारी करो

राजा कृष्णदेव राय ने कहा कि तुम हमारी भी दूसरे को आते समय  सोने  सिक्कों  की थैली  लेकर आना राजा कृष्णदेव राय जी से आज्ञा लेकर तेनाली रमन विजयनगर से चल पड़ा। कुछ दिनों बाद तेनाली रमन दिल्ली पहुंचा बाबर को रमन के आगमन की सूचना मिल गई  

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बाबर ने सारे दरबारियों से कहा जब वह यहां आएगा तो कोई नहीं   हंसेगा अगर कोई हंसा तो उसका नतीजा अच्छा नहीं होगा। तेनाली रमन बाबर के दरबार में पहुंचा ब्राह्मण का भव्य स्वागत हुआ। रमन ने बाबर को प्रणाम किया और विजयनगर से  लेकर आई भेंट  बाबर को देदी सुमन ने भरे दरबार में बहुत सारे चुटकुले और मजेदार कहानियां सुनाइए लेकिन दरबार में से कोई भी हंसने के लिए तैयार नहीं था

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 उसने बहुत कोशिश की लेकिन सब बेकार उसे लगा  सोने के सिक्कों के बिना ही राजा कृष्णदेव राय जी के पास जाना पड़ेगा सारी रात वह बाबर कर दे जितनी के बारे में सोचता  रहा अगले दिन सदा की तरह बाबर अपने घोड़े पर घूमने  निकले रास्ते में उन्होंने एक बूढ़े आदमी को जमीन खोदते हुए देखा बाबर ने उनसे कहा इस उम्र में आप खुद को क्यों  थका रहे हो  

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उस बुजुर्ग ने कहा कि मैं इमली का पौधा लगा रहा हूं यह सुनके बाबर हैरान हो गए वह बोले पागल हो गए हो क्या? क्या तुम्हें ऐसा लगता है कि इसमें फलाने तक तुम जिंदा  रहो पाओगे? बुजुर्ग ने बड़ी विनम्रता से कहा जहांपना मैं जो आज  भोग रहा हूं वह हमारे पुरखों का दिया हुआ है मेरी अगली पीडीपी इस पेड़ के फल खाएगी जो मैं आज बो रहा हूं   
बाबर ने कहा तुम्हारा कहना बिल्कुल ठीक है और उसी के साथ ही उस बूढ़े आदमी को बाबर ने एक सोने के सिक्कों की थैली भेंट कर दी    उस बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा हर एक के लिए अपने पैरों के फल खाने के लिए बहुत इंतजार करना पड़ता है लेकिन मुझे तो अपने  पेड़ का फल आज ही मिल गए यह सुनकर बाबर अत्यंत प्रसन्न हो गए
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उन्होंने फौरन और एक थैली इनाम में दे दी फिर वह बुजुर्ग बोला हर एक व्यक्ति को फल निकलने के बाद ही उसका फायदा मिलता है लेकिन मुझे तो आज ही फायदा हो गया वह भी दोहरा बाबर बोला तुम बहुत समझदार हो इसलिए एक हथेली और लो
बाबर ने घोड़ा दौड़ाया लेकिनआवाज सुनते ही रोक दिया पीछे से बुजुर्ग  बोला रुके जहांपना  बाबर ने जैसे ही पीछे देखा वह अचंभित रह गए क्योंकि उस बूढ़े ने अपनी दाढ़ी उतार ली वह और कोई नहीं बल्कि तेनाली रमन ही था बाबर बोले तो रमन अभी तक तो तुम मुझसे बातें कर रहे थे तेनाली रमन बोला आजा अपना वह में ही था मेरे राजा ने मुझसे एक सोने की थैली लाने के लिए कहा था लेकिन मैंने आपसे  तीन थैली पाली  यह बात सुनकर बाबर ने रमन को और एक हथेली बैठ कर दी और बोला तुम बहुत बुद्धिमानी हो   
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तभी तेनाली रमन बोला मैं दिल्ली से वापस जाने की आज्ञा चाहता हूं बाबर ने तुरंत उसे मंजूरी दे दी और बाबर वहां से चला गया। अनुमति लेकर रमन ने दिल्ली से विजयनगर की ओर प्रस्थान किया। और विजय नगर पहुंचा  
राजा कृष्णदेव राय ने तेनाली रमन का बहुत अच्छी तरह से स्वागत किया और अमन से पूछा क्या तुम्हें बादशाह की तरफ से कोई पुरस्कार मिला? तेनाली रमन बोला हमारा आज मैंने एक नहीं बल्कि  4  सोने की थैलियां पाली
  तेनाली रमन ने दिल्ली की सारी हकीकत राजा कृष्णदेव राय जी को बता दी कृष्णदेव राय  ने कहा तेनाली रमन तुमने फिर एक बार विजयनगर का सम्मान बढ़ाया है



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तेनाली रमन की चतुराई 

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