एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स की जीवनी – Steve Jobs Biography in Hindi



Steve Jobs Biography in Hindi
Steve Jobs Biography in Hindi

एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स की जीवनी – Steve Jobs Biography in Hindi
 जब मैं 17 साल का था तो मैंने बुक में पढ़ा था कि यदि आप हर रोज ऐसे जियो जैसे कि यह आपकी जिंदगी का आखरी दिन है तो आप किसी किसी दिन सही साबित हो जाओगे।
 यह विचार मेरे दिमाग पर छा गया और तब से मैंने हर सुबह शीशे में खुद से यह सवाल किया है कि अगर यह दिन मेरी जिंदगी का आखरी दिन होता तो क्या मैं आज वह करता जो मैं करने वाला हूं ?
और जब भी लगातार कई दिनों तक जवाब नहीं में होता तब मैं समझ जाता हूं कि कुछ बदलने की जरूरत है।  कुछ नया करने की जरूरत है।
 इस बात को याद रखना कि मैं बहुत जल्दी मर जाऊंगा, मुझे अपनी जिंदगी के बड़े निर्णय लेने में सबसे मददगार होते हैं। क्योंकि जब मैं एक बार मौत के बारे में सोचता हूं तब सारी उम्मीद सारा गर्व असफल होने का डर सब कुछ गायब हो जाता है।   और सिर्फ वही बचता है जो वाकई में जरूरी है।   ऐसा कहना है दुनिया के सबसे प्रभावशाली बिजनेसमैन स्टीव जॉब्स का। 
  जिन्होंने अपने संघर्ष के दम पर वह मुकाम हासिल किया जो कि हर किसी के बस की बात नहीं। स्टीव जॉब्स की इस स्पीच में बहुत ही गहराई है।  अगर आप इस बात को ध्यान से समझें तो यह आपने एक नई ऊर्जा भर देगा और इससे भी ज्यादा ऊर्जावान उनके जीवन की कहानी है यह ऐसी शख्सियत थे जिन्हे नही अपने पैसे से प्यार था और नहीं पैसा उनकी आन थी। बल्कि लाइन  से हटकर सोचना तथा तकनीक को नए रूप में परिभाषित करना उनके प्रबल व्यक्तित्व की विशेषताएं थी। लेकिन स्टीव जॉब्स के लिए उनकी जिंदगी कभी आसान नहीं रही उनका प्रारंभिक जीवन काफी भ्रम और उत्तल पुथल से भरा हुआ था। तो बिना समय गवाए उनके बारे में शुरू से जानते हैं। 

 स्टीव जॉब्स की जीवनी एक नजर में – Steve Jobs short biography in Hindi


पूरा नाम (Name)
स्टीव पॉल जॉब्स
जन्म (Birthday)
24 फरवरी 1955,सेंट फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया
पिता (Father Name)
अब्दुलफत्तः जन्दाली, पॉल जॉब्स (जिन्होंने गोद लिया था)
माता (Mother Name)
जोअन्नी सिम्पसन, क्लारा (जिन्होंने गोद लिया था)
पत्नी (Wife Name)
लोरिन पॉवेल (1991-2011), किर्स्टन ब्रेन्नन
बच्चे (Childrens Name)
लिसा ब्रेन्नन,एरिन जॉब्स, ईव जॉब्स, रीड जॉब्स
मृत्यु (Death)
5 अक्टूबर 2011 (कैलीफोर्निया)

स्टीव जॉब्स का प्रारंभीक जीवन  

  एप्पल कंपनी के कोफाउंडर इस अमेरिकी को दुनिया सिर्फ एक सक्सेसफुल एंटरप्रेन्योर   बिजनेसमैन  रूप में ही नहीं जानती बल्कि उन्हें विश्व की मोटिवेशनल स्पीकर्स में भी ऊंचा दर्जा  प्राप्त  है। स्टीव जॉब्स का जन्म 24 फरवरी 1955 को कैलिफोर्निया में हुआ था।  
उनका वास्तविक नाम स्टीव पॉलिजॉर्ब था। उनके वास्तविक माता-पिता की आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब थी और वह नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे को भीउनके जैसी जिंदगी में जीना पड़े।   इसलिए उन्होंने स्टीव को गोद देने का फैसला किया । 
उनके पिता इलेक्ट्रिकल वर्कशॉप चलाते थे।  इसलिए स्टीव का ज्यादातर समय अपने पिता के साथ उनकी मदद करने में व्यतीत होता था। यही वह माहौल था जिसने उन्हें चीजों को सही रूप में जोड़कर नई चीजों को बनाना सिखाया और फिर धीरे-धीरे इलेक्ट्रॉनिक उनका शौक बन गया। 
पॉल और कालरा मिडल क्लास फैमिली से थे।  और उनके पास ज्यादा पैसे नहीं हुआ करते थे फिर भी वह इस चीज की हर जरूरतों को पूरा करते थे और उन्हें सबसे अच्छी स्कूल में पढ़ानेका फैंसला किया।



स्टीव जॉब्स की शिक्षा एवं शुरुआती करियर – Steve Jobs Education and starting career 

 प्राथमिक विद्यालय में 4 साल पढ़ने के बाद किसी कारणवश उनके पिता को दूसरे शहर लॉस ऑल्टो में शिफ्ट होना पड़ा।  और यहां उनका दाखिला होमस्ट्रीट माध्यमिक विद्यालय में करा दिया गया। 
 जहां उनकी मुलाकात स्टीव वोजनियाक से हुई जो आगे चलकर एप्पल कंपनी में साझेदार भी बने। स्टीव की प्रारंभिक शिक्षा मोंटानो माय स्कूल में हुई और सन 1972 में अपनी कॉलेज की पढ़ाई के लिए और ऑरगेन के रीड कॉलेज में एडमिशन ले लिया जो कि वहां की सबसे महंगी कॉलेज थी। 
स्टीव वोजनियाक  का दिमाग भी काफी तेज था और उन्हें भी इलेक्ट्रॉनिक से बहुत प्यार था।   शायद इसीलिए दोनों में जल्द ही दोस्ती हो गई। 
स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद स्टीव जॉब्स ने आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए रीड कॉलेज में एडमिशन तो ले लिया लेकिन इस कॉलेज की फीस इतनी महंगी थी कि उनके माता पिता के लिए उसे दे पाना संभव नहीं हो पा रहा था।
 जिसकी वजह से उनके माता पिता हर प्रयासों के बाद भी उनकी फीस नहीं भर पाते थे। स्टीव को भी अपने परिवार वालों को प्रॉब्लम में देखकर रहा नहीं गया, उन्होंने फीस भरने के लिए वीकेंड्स में कोल्डड्रिंक के बॉटल्स बेचना स्टार्ट कर दिया। और स्टीव जॉब्स को भी अपने माता-पिता का पैसा बर्बाद करना अच्छा नहीं लगा क्योंकि उन्हें इस पढ़ाई में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी इसीलिए छह महीने बाद ही उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया जिसके बाद एक आधिकारिक छात्र के रूप में वे केवल अपने मनपसंद विषय कैलीग्राफी (Calligraphy)  की क्लास लेने लगे।
 यह ऐसा समय था जब स्टीव जॉब्स के पास बिल्कुल पैसे नहीं होते थे यहां तक कि अपने हॉस्टल के   कमरे का किराया भी नहीं दे सकते थे जिससे वे अपने दोस्त के कमरे में फर्श पर सोते थे।
 स्टीव जॉब्स खाना खाने के लिए हर रविवार 7 मील दूर पैदल चलकर मंदिर जाते ताकि हफ्ते में एक बार पेट भर खाना खा सकें। अपने माता-पिता को कड़ी मेहनत करता देख उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने कॉलेज छोड़ दी उसके बाद   उन्होंने अपना पूरा समय अपने पहले से सोचे हुए बिजनेस पर लगाने लगे।




स्टीव जॉब्स का भारत में आध्यात्मिक सफर - Spiritual journey of steve jobs in india

उसके बाद वर्ष 1972 में स्टीव जॉब्स को पहली नौकरी एक वीडियो गेम बनाने वाली कंपनी में मिली उन्होंने कुछ वर्षों तक काम किया लेकिन जैसा कि होता है हर इंसान की  जिंदगी का एक आध्यात्मिक पक्ष भी होता है। और उसे पाने के लिए किसी का तरीका भी अलग  है। 
स्टीव जॉब्स  अध्यात्मिक स्थान भारत था और जिसके लिए उन्होंने पैसे बचाने शुरू किए।  
  सन 1974 में भारत अपने दोस्त डेनियल कोर्ट के साथ आये थे, जो बाद में जाकर एप्पल कंपनी के एम्पलाई भी बन गए।  
  भारत में 7 महीने रहे और बौद्ध धर्म को पढ़ा और समझा जिसके बाद वह वापस अमेरिका चले गए और फिर से अटारी कंपनी में काम करने लगे। 



सबसे प्रतिष्ठित कंपनी एप्पल के फाउंडर के रुप में – Steve Jobs Apple Founder

 यहीं पर स्टीव जॉब्स और स्टीव वोज्नियाक  एक बार फिर अच्छे दोस्त बन गए। दोनों ने मिलकर काम करने का सोचा और जहां दोनों की रुचि इलेक्ट्रॉनिक में थी तो कंप्यूटर बनाना उनके लिए सही फैसला था।
 स्टीव ने अपने स्कूल के दोस्त वोज्नियाक के साथ मिलकर अपने पिता के छोटे से गैराज में ऑपरेटिंग सिस्टम मैकिनटोश तैयार किया। और इस ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर को बेचने के लिए एप्पल नाम के कंप्यूटर का निर्माण करना चाहते थे।
  लेकिन पैसों की कमी के कारण वह ऐसा नहीं कर पा रहे थे। उनकी यह समस्या उनकी एक मित्र माइक मर्ककुला ने दूर कर दी और उसके बाद सन् 1976 में मात्र 20 वर्ष की उम्र में उन्होंने एप्पल कंपनी की शुरुआत की और उनके मित्रों की कड़ी मेहनत से देखते ही देखते कुछ सालों में एप्पल कंपनी एक छोटे से गैराज से बढ़कर $2000000000 और 4000 कर्मचारियों वाली कंपनी बन चुकी थी।
 दोनों ने मिलकर अपने पापा के छोटे से  गैराज  से अपने जुनून को हकीकत में बदला उस समय उम्र मात्र 21 साल थी। 
इस काम को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें इंटेल कंपनी के इंजीनियर से सहयोग राशि प्राप्त हुई। काफी मेहनत के बाद उन्होंने अपना पहला कंप्यूटर सैन फ्रांसिस्को के कंप्यूटर में पेश किया ।  
लोगों ने खूब पसंद किया जिसके बाद 12 दिसंबर 1980 को पहली बार कंपनी का आईपीओ बाजार में उतारा गया जिससे एप्पल एक सार्वजनिक कंपनी बन गई और एप्पल के आईपीओ ने विश्व के किसी भी कंपनी से ज्यादा लगभग 300 व्यक्तियों को रातों रात करोड़पति बना दिया। 
  

स्टीव को जब अपनी ही कंपनी एप्पल से बाहर निकाला

स्टीव जॉब्स के जीवन में एक दौर वो भी आया, जब उनकी ही कंपनी ने उन्हें रिजाइन करने के लिए मजबूर किया था।
दअरसल, लगातार कामयाबी हासिल कर रही एप्पल को उस समय ब्रेक लगा जब उनसे एप्पल 3 और फिर लिसा कंप्यूटर (जिसका नाम स्टीव की बेटी के नाम पर रखा गया था) लॉन्च किए। ये दोनों ही प्रोडक्ट बुरी तरह फ्लॉप रहे और दुर्भाग्य से इसका जिम्मेदार स्टीव जॉब्स को ठहराया गया।
 स्टीव की यह उपलब्धि ज्यादा देर तक नहीं रही, उनके  पार्टनर द्वारा उनको नापसंद किए जाने और आपस में कही सुनी होने के कारण एप्पल   कंपनी की लोकप्रियता कम होने लगी और धीरे-धीरे कंपनी कर्ज में डूब गई जिसके बाद बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की मीटिंग हुई और उसमें सारे  दोषी स्टीव का ठहरा कर सन 1985 में उन्हें कंपनी से बाहर कर दिया। यह उनके जीवन का सबसे दुखद पल था जिस कंपनी को उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से बनाया था उसी ने उन्हें निकाल दिया था। 
इसके बाद वह टूट चुके थे।  और असफलता उन्हें खाए जा रही थी।  लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी नेक्स्ट थिंग नाम की कंपनी खोली और इस कंपनी से उन्होंने इतने पैसे कमाए की  1986 में  स्टीव जॉब्स ने एक ग्राफिक्स कंपनी खरीदी जिसका  जिसका नाम उन्होंने पिक्सएल रखा। उन्होंने सफलता हासिल की और इधर स्टीव जॉब्स के बिना एप्पल कंपनी घाटे में चल रही थी तब एप्पल ने 477 मिलियन डॉलर से नेक्स्ट कंपनी को खरीद लिया।

  एप्पल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने स्टीव जॉब्स से कंपनी में वापस आने की बहुत रिक्वेस्ट की 1996 में स्टीव ने फिर से एप्पल ज्वाइन कर लिया और पिक्सल को एप्पल के साथ जोड़ दिया। और स्टीव जॉब्स फिरसे बन गए एप्पल के सीईओ।
 जब स्टीव वापस एप्पल में आए थे उस समय एप्पल में करीब 250 प्रोडक्ट थी उन्होंने आने के बाद अगले कुछ सालों में इसकी संख्या 10 कर दी और केवल 10 प्रोडक्ट्स पर अपना ध्यान केंद्रित करने लगे। उनका मानना था कि प्रोडक्ट की क्वांटिटी नहीं क्वालिटी में ध्यान देना चाहिए।  

 सन 1998 में उन्होंने आईमैक को बाजार में लांच किया जो काफी लोकप्रिय हुआ और उसके बाद एप्पल ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और फिर आईपैड और आईफोन भी लांच किए। जिसके बाद उन्होंने एप्पल के अनोखे प्रोडक्ट निकाले जैसे आईपॉड  2007 में स्टीव जॉब्स ने एप्पल का मोबाइल फोन निकाला  उसके बाद बाजार में क्रांति ला दी थी जो आज भी लोग  दिलों में छाया हुआ है।

 5 अक्टूबर 2011 को मात्र 56 वर्ष की आयु में कैंसर की बीमारी के चलते उनका निधन हो गया और अगले ही दिन कैलिफ़ोर्निया के राज्यपाल द्वारा उस दिन को स्टीव जॉब्स डे के रूप में मनाने की घोषणा कर दी गई। Think Different  यह स्टीव जॉब्स का मूलमंत्र था ।  

कितना छोटा सा शब्द लेकिन कितनी गहराई से लदे हुए इसी शब्द के भरोसे उन्होंने उद्योग जगत को बदला ।  उनका हमेशा से यह मानना था कि जीवन में यदि हमें सफल होना है तो किसी का भी इंतजार किए बिना हमें अकेले जीना सीखना होगा । 

स्टीव जॉब्स का निधन हो गया लेकिन आज भी उनकी लोकप्रियता पहले की तरह ही बरकरार है स्टीव का कहना है कि "जो लोग इस बात को पागलों की तरह सोचते हैं कि वह दुनिया बदल सकते हैं, सच में वह दुनिया को बदलते हैं। "  








स्टीव जॉब्स मोटिवेशनल - Steve jobs motivational quotes :

1. अगर आज मेरी जिंदगी का आखरी दिन होता तो क्या में आज वो करता जो आज करने वाला हु


-स्टीव जॉब्स


2: आओ आने वाले कल में कुछ नया करते है बगैर इसकी चिंता करे, की कल क्या हुआ था।
                                                                                                                  -स्टीव जॉब्स


3: डिजाइन वह नहीं है कि चीज कैसी दिखती या महसूस होती है। डिजाइन वह है कि चीज काम कैसे करती है।
-स्टीव जॉब्स


4: महान कार्य करने का एक मात्र तरीका यह है की आप अपने काम से प्यार करे।
-स्टीव जॉब्स


5: किसी चीज़ को महत्तवपूर्ण होने के लिए दुनिया को बदलने की जरुरत नहीं है।
-स्टीव जॉब्स


 आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद । 




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