akbar birbal story in hindi | akbar birbal hindi story - अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां | बीरबल को दंड | नन्हा साक्षीदार


akbar birbal story in hindi or akbar birbal hindi story - अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां हम सब बचपन से सुनते आ रहे है। akbar birbal story - अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां बहोत मशहूर है।  बीरबल अपने चतुर बुद्धि के कारन प्रसित्द्ध थे। बीरबल हर काम को बड़ी चतुराई के साथ पूरा करते थे।  दोस्तों हिंदी Story Line आपके लिए लेकर आये है ऐसे ही मजेदार अकबर बीरबल की हिंदी कहानिया akbar birbal story in hindi। यह कहानी को भी पढ़े।  


१. बीरबल को दंड


akbar birbal story in hindi
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 एक दिन अकबर बादशाह बीरबल पर बहुत गुस्सा हो गए । उन्होंने कहा यह क्या हो रहा है बीरबल ? तुमने हमारी बेगम को गला ठीक होने की दवाई दे दी थी और उससे गला ठीक होने के बजाय और भी  खराब  हो गया है।  
 तुमने सुना वह कितना खराब गाना गा रही है।  पहले उसे चुप  कराओ या फिर उसे अंदर ले जाओ । उस पर बीरबल बोले मेरे हिसाब से जो सबसे बढ़िया दवाई थी वही मैंने उनको दी थी । 

कभी-कभी किसी को दवाई का फायदा नहीं होता है ।तभी बाकी दरबारियों ने कहा बादशाह की बेगम का गला  कोई प्रयोग करने की चीज नहीं है और तुम्हारी वजह से बादशाह को  काफी तकलीफ झेलनी पड़ रही है । इसके लिए बीरबल को सजा मिलनी चाहिए ।

 बीरबल ने अपनी गलती को कबूल किया ।  तभी शेरखान बोले खाली गलती कबूल करने से कुछ नहीं होगा इसकी तो  सजा तो मिलनी ही चाहिए ।

akbar birbal story in hindi
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 बादशाह अकबर  ने कहा शेरखान बिल्कुल ठीक बोल रहे हैं इस गलती की सजा तो तुम्हें मिली ही चाहिए । बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा कि क्या सजा दी जाए तुम्हें?  उस पर बीरबल ने कहा यह मैं कैसे कह सकता हूं ?  और मुझ पर आरोप अपने ही रखा है इसलिए आप  बादशाह होते हुए भी  आप मुझे सजा नहीं दे सकते । और मुझे क्या सजा मिलेगी इस बात का निर्णय आप नहीं कर सकते हुजूर। इसी कशमकश में शेरखान बोले अगर आपको कोई एतराज नहीं तो इस मामले  का इंसाफ करता हूं ।

  बादशाह अकबर ने कहा  इस राज्यसभा में बीरबल से नाराज बहुत लोग हैं इसलिए इसका इंसाफ पारदर्शक होना जरूरी है वरना बीरबल के साथ अन्याय होगा । तो फिर सारे लोगों ने पूछा इसका इंसाफ कौन करेगा? बादशाह अकबर ने कहा वह तो बीरबल ही  बताएगा । 

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 शेरखान बोला तो फिर फिर अपनी तरफदारी करने वालों को ही बुलाएगा  । बादशाह अकबर ने कहा आज तक बीरबल ने सभी को सही इंसाफ दिया है और इसी वजह से इसका भी सही इंसाफ होना बहुत जरूरी है इसलिए इस मामले का इंसाफ कौन करेगा यह बीरबल ही बताएगा ।
 इस पर सोच विचार करके बीरबल ने कहा अपने शहर के बाहर एक गरीब बस्ती में दीनदयाल रोग लोग रहते  है अगर आपको कोई एतराज नहीं  तो मुझे अपना  न्याय उन लोगों से करवाना चाहूंगा ।

 इस पर सारे दरबारी बोले कि वह तो अनपढ़ हैं वह  क्या न्याय  करेंगे?  बीरबल ने कहा भले ही अनपढ़ हो लेकिन बुद्धि हीन नहीं है । और न्याय करने के लिए कोई पुस्तक पढ़ने की आवश्यकता नहीं है । बादशाह अकबर ने कहा अगर तुम कह रहे हो तो वह लोग ही तुम्हारा  न्याय करेंगे  जाओ लेकर आओ उन्हें ।

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 फिर एक सिपाही को शहर के बाहर के बस्ती की तरफ उन लोगों को बुलाने के लिए भेजा गया । उसी ने बस्ती के लोगों को लेकर राज दरबार में पहुंचा । बादशाह ने उन लोगों से पूछा क्या तुम जानते हो कि तुम्हें यहां क्यों बुलाया गया है? वह घबरा गए और बोले कि हमने कुछ नहीं किया बादशाह सलामत हमें छोड़ दीजिए । उस पर  बादशाह ने कहा घबराओ मत  तुम्हें कोई सजा नहीं  मिलेंगी तुम्हे  बीरबल को सजा सुनानी है । वह लोग बोले बीरबल को सजा सुनाने का मतलब है कि सूरज को काजल दिखाना । उस पर  बादशाह ने कहा यह तो बीरबल  की इच्छा है और मेरा हुकुम ।
बीरबल द्वारे किए गए अपराध के बाद बादशाह ने उन तीनों लोगों को बता दी और कहा कि तुम तीनों बातचीत करके  तय करो कि बीरबल को क्या सजा देनी है? फिर वह तीनों आपस में कुछ बोलने लगे । 

 बहुत समय बाद वह तीन्हो कुछ नतीजे पर पहुंचे और उन्होंने बादशाह अकबर से कहा कि हमने तय कर लिया है कि बीरबल को क्या सजा देनी है । फिर तीनों ने कहा  बीरबल को पूरे 5 मुहावरों का जुर्माना भरना होगा । उनका निर्णय सुनते हैं शेर खान की आंखों के सामने तारे आ गए ।

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5 मोरों का दंड बीरबल के लिए बहुत ही मामूली था । यह सुनकर अकबर को वेदाश्री हुआ और आखिर बीरबल ने अपना तटस्थ ने करवाने के लिए आजमाए हुई युक्ति की अकबर ने तहे दिल से  तारीफ की ।







 २. नन्हा साक्षीदार


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एक बार एक गरीब ब्राह्मण  किसी समृद्ध घर के सामने दरवाजा खटखटाते हुए बोला घर में कोई है?  उस घर में से आवाज आई कौन हैं? मैंने आपको पहचाना नहीं  । ब्राह्मण बोला मैं एक प्रवासी हूं काशी यात्रा के लिए निकला हूं । आज  संध्या समय होते होते आपके गांव   पहुंचा  तो कृपया आज की रात आप मुझे अपने घर में आसरा दीजिए ।  सुबह होते ही मैं अपनी मंजिल की ओर निकल जाऊंगा । 

 गरीब ब्राह्मण की बातें सुनकर यजमान को दया आ गई । वह तुरंत ही बोला  आइए ब्राह्मण महाराज मुझे कोई तकलीफ नहीं है मुझे आपका सेवा करने का मौका मिल रहा है यह मेरा सौभाग्य है । ब्राह्मण  ने यजमान  को आशीर्वाद दिया ।


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यजमान ने ब्राह्मण को अपने घर में  आसरा दिया उसे पेट भर भोजन करवाया और सोने के लिए अलग कमरा भी दिया ।  दिन भर के प्रवास के कारण ब्राह्मण को जल्दी नींद आ गई । 
उन दिनों उस गांव में बहुत सारी चोरी होती थी । इसलिए सरकार ने रात के समय पहरा देने वालों सिपाही की संख्या बढ़ा दी थी । दुर्भाग्य से उन्हें पहरेदार  सिपाही में से एक सिपाही चोरी करता था और चोरी का माल अपने घर ले जाता था । 

 यजमानने ब्राह्मण को जो कमरा सोने के लिए दिया था उसी कमरे की दीवार  पहरेदार सिपाही ने कुदाली से तोड़ दी और अंदर घर में  एक संदूक की और  उसने कदम बढ़ाए । खोलकर देखा तो उसमें कीमती जवाहरात थे । 

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वह तुरंत ही संदूक लेकर चल पड़ा लेकिन जाते-जाते  उस सिपाही का  पैर उसी कमरे सोए हुए ब्राह्मण को लगा । ब्राह्मण ने सिपाही का पांव पकड़ लिया और जोर जोर से चिल्लाने लगा चोर चोर तभी वो सिपाही ब्राह्मण से कहने लगा छोड़ो मुझे जाने दो वरना अच्छा नहीं होगा । 

ब्राह्मण जोर-जोर से  चिल्लाने लगा । वह सिपाही समझ गया कि ब्राह्मण इस घर में नया है उसने वह संदूक में से कोई जवाहरात ब्राह्मण को देने का प्रलोभन दे दिया और कहा बार चलकर हम इसे आधा-आधा बांट लेते हैं । ब्राह्मण ने कहा तुमने तो सिपाही की वर्दी पहन ली है और फिर भी तुम चोरी करते हो  । 


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सिपाई को पता चल गयाा अब यह चोरी अपने सर पर ही आएगी इस बात का पता चलने पर उसने जोर जोर से चिल्लाना शुरू किया आपका  अतिथि संदूक लेकर दीवार छोड़ कर भाग रहा है । मैंने से पकड़ लिया है आप जल्दी  आ जाओ । यजमान को  देखते ही सिपाही ने संदूक को छोड़कर  ब्राह्मण को पकड़ लिया और उनसे कहा यह देखिए आपका चोर यह संदूक लेकर भाग रहा था मैंने उसे पकड़ लिया है । 

यजमान को ब्राह्मण  की बात का भरोसा नहीं हो रहा था । उन्हें लगा कि यह ब्राह्मण मन में कपट लिए मेरे घर में घुसा है और मौका मिलते ही चोरी कर रहा था । यजमान बोला मैंने तो तुम पर दया करके रहने के लिए जगह दी थी और तुम मेरे ही घर में चोरी करने वाले थे । इसका क्या किया जाए यह बादशाह ही तय करेंगे दूसरे दिन यजमान सेठजी, ब्राम्हण और सिपाही के साथ बादशाह अकबर के दरबार में आए । 

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उन्होंने बादशाह अकबर को रात की घटी हुई सारी हकीकत  बताइए । बादशाह अकबर ने बीरबल से कहा बीरबल  अब इसका फैसला तुम ही करो ।  बीरबल ने पूछा अब बताओ  भूदेव कौन है? और आपके घर में कैसे पहुंचे? ब्राह्मण बोले मैं एक प्रवासी हूं और काशियात्रा को निकला हूं यह मैंने कहा किनकी बिनती सुन कर मैंने अपने घर में रहने का आसरा दिया और इन्होंने मेरे घर में..... चोरी कर.....  ब्राह्मण बोले नहीं नहीं इस सिपाही ने चोरी की और संदूक लेकर भाग रहा था तभी मैंने उसको पकड़ लिया ।.... 

यह चर्चा जोर-शोर से चल रही थी तभी दूसरे  एक  सिपाही  ने कहा  महाराज मुझे शमा कर दीजिए मैं बीच में बोल रहा हूं परंतु मेरा काम ही ऐसा है ।

 जहाँपना में और मेरा बेटा गांव के बाहर हनुमान मंदिर में दर्शन करने के लिए गए थे दर्शन करके हम दोनों बाहर आ रहे थे  तभी बच्चा मूर्छित हो गया और जमीन पर गिर पड़ा  बादशाह में डर गया  हु और उसको उठाने की हिम्मत मुझ में नहीं है आप किसीको मेरे साथ भिजवा  दीजिए । 

बीरबल ने कहा उसकी चिंता तुम मत करो, तुम वहां मत जाना, बीरबल ने उन दोनों को हनुमान मंदिर जाने का आदेश दिया और कहा हनुमान मंदिर जाकर उस बच्चे को लेकर आओ तुम्हारे आने के बाद ही हम इसका फैसला करेंगे । फिर  वह सिपाही और ब्राह्मण मंदिर की ओर चल पड़े । सिपाही मंदिर का स्थल जानता था और  आज्ञा होते ही वह उस मंदिर के और  ब्राह्मण के साथ-साथ  चल पड़ा ।

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 ब्राह्मण के वस्त्र की झोली बनाकर  उसमें बच्चे को डालकर वह दरबार की ओर चले जा रहे थे। रास्ते में चलते चलते ब्राह्मण ने सिपाही से कहा अरे मूर्ख वास्तव में दीवार तुमने  तोड़ दी, चोरी भी तुम ही कर रहे थे और फिर भी समय आने पर तुमने कहा कि चोरी मैंने की है  । सिपाही ने कहा आपकी बात सही है पर मैं संदूक मैं रखे हुए गहने का आधा हिस्सा तो मैं देने के लिए तैयार था पर आपने  मेरी बात ही नहीं  सुनी अब    भूगतो  अपने प्रामाणिक बनने का फल । बोलते बोलते दोनों उस बच्चों को लेकर दरबार पहुंचे  ।

 बच्चे के पिता ने अपने बच्चों को एक जगह सुलाया और वह भी वहीं बैठ गया  ।और बीरबल ने फिर एक बार उन दोनों को सवाल पूछा तुम दोनों में से चोरी किसने की? दोनों ने एक दूसरे की ओर इशारा करते हुए कहा इसने सिपाही बोला क्या बना मैं इस राज्य का सिपाही हूं और रक्षा करना मेरा फर्ज है । 

मैं कैसे चोरी कर सकता हूं? तभी वह बच्चा बोला यह रक्षक तुमने चोरी की है मैंने तुम्हारी सारी बातें सुन ली है।   दीवार तोड़कर तुम ही संदूक लेकर भाग रहे थे । असली चोर का पता चलने पर सारे दरबार अचंभे में पड़ गया । बीरबल ने तुरंत ही  उसे सिपाही को कारावास की सजा सुनाई । और उस ब्राह्मण को निर्दोष जाहिर किया । 
 अकबर बादशाह ने कहा तुम्हारे बेटा तो मूर्छित हो गया था ।  सिपाही ने कहा नहीं जाना बीरबल ने ही मेरे बेटे को वहां सुलाने के लिए कहा था ।  और यह कहते हैं अकबर बादशाह बीरबल पर स्तुति सुमन  बरसाने लगे ।

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और इसी तरह से एक नन्ही से साक्षीदार की वजह से ब्राह्मण की जान  बच गई ।




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